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अभिनव ने लगातार दूसरी बार यूपीएससी में सफलता हासिल कर बढ़ाया चाईबासा का मान

नागपुर में आईआरएस की ट्रेनिंग के दौरान आये फोन से पता चला परीक्षा का परिणाम

चाईबासा (झारखण्ड) : चाईबासा के बड़ीबाजार के रहने वाले राजकुमार गुप्ता के पुत्र अभिनव गुप्ता ने लगातार दूसरी बार यूपीएससी की परीक्षा उत्तीर्ण कर पश्चिमी सिंहभूम जिले का नाम रोशन किया है। अभिनव गुप्ता का यूपीएससी में 360वां रैंक आया है। उनकी इस सफलता से परिवार में जश्न का माहौल है। 2020 में निकले यूपीएससी के परीक्षा परिणाम में अभिनव गुप्ता का 472वां रैंक आया था। उन्होंने इंडियन रेवेन्यू सर्विस में योगदान दिया था। वर्तमान में वो नागपुर में स्थित आइआरएस में ट्रेनिंग कर रहे हैं।

मोबाइल फोन पर पत्रकारों से बातचीत करते हुए अभिनव ने कहा, मैं नागपुर सेंटर में अपनी ट्रेनिंग क्लास करके बाहर आया तभी जानकारी मिली कि मेरा यूपीएससी में 360वां रैंक आया है। उसके बाद चाईबासा में फैमिली से बात कर यह खुशखबरी दी। पिछली बार रैंक अच्छा नहीं आने की वजह से आईआरएस ज्वाइन किया था। मुझे उम्मीद है कि अब मेरा आइएएस बनने का सपना पूरा हो जायेगा।

26 साल के अभिनव चाईबासा में संत जेवियर इंग्लिश स्कूल में आइसीएसई दसवीं बोर्ड के टॉपर स्टूूडेंट रहे हैं। 12वीं की पढ़ाई दिल्ली पब्लिक स्कूल रांची से की है। 2016 में हरियाणा में कुरुक्षेद्ध में अवस्थित नेशनल इंस्टीच्यूट आफ टेक्नोलाजी एनआइटी से इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग की। उसके बाद गुड़गांव में एक डाटा एनालायसिस से जुड़ी मल्टीनेशनल कंपनी में नौकरी की। अलगे ही साल मुंबई में इन्वेंस्टमेंट बैंकिंग से जुड़ी एक मल्टीनेशन कंपनी में ज्वाइन कर लिया।

जॉब में रहकर भी आईएएस बनने का बरकरार रखा जज्बा

अभिनव कहते हैं कि मेरे परिवार की आर्थिक स्थिति बहुत बेहतर नहीं थी। पिता राजकुमार गुप्ता की चाईबासा में साइकिल की दुकान है। वहां रिपेयरिंग का काम ज्यादा होता है। यूपीएसएसी की तैयारी में पिता पर बोझ नहीं पड़े, इसलिए इंजीनियरिंग के तुरंत बाद जॉब शुरू कर दिया। मेरा सपना आईएएस बनने का था। इसलिए जॉब करते हुए भी पढ़ाई नहीं छोड़ी। वीक डेज में दो से तीन घंटा और वीकेंड में 6 घंटा पढ़ाई करता था। कोचिंग लेना संभव नहीं था। इस कारण आनलाइन ही यू-ट्यूब चैनल मुरुनल से पढ़ाई की। मेरा मेन सब्जेक्ट सोशियोलाजी था। यूपीएसएसी की तैयारी करने के लिए लक्ष्मीकांत की पोलेटिक्ल साइंस, शंकर की इनवायरमेंट साइंस, जियोग्राफी के लिए एनसीआरईटी, इकोनामिक्स के लिए रमेश सिंह, आर्ट एंड कल्चरल के लिए रमेश सिंह की बुक्स को रेफरेंस के लिए पढ़ा। करंट अफेयर्स के लिए न्यूजपेपर व मंथली मैगजीन पढ़ता था। पढ़ने का बहुत ज्यादा समय नहीं मिलता था। इस वजह से सेलेक्टिव स्टडी पर फोकस किया। सभी सब्जेक्ट के नोट्स बनाकर उनका बार-बार अध्ययन करते रहा।

नये प्रतिभागियों को दिया सफलता का मंत्र

अभिनव गुप्ता ने नये प्रतिभागियों को संदेश देते हुए कहा कि हमें कुछ अलग बनने के लिए या यूूं कहूं कि प्रशासनिक सेवा में जाने के लिए खुद से मन लगाकर पढ़ना होगा। पढ़ाई के दौरान यह हमेशा ध्यान रहे कि क्या पढ़ना है। उसे अनुशासन में रहकर पढ़ें। चाईबासा जैसी छोटी जगह में बड़ी परीक्षाओं की तैयारी के लिए अच्छे सेंटर नहीं है। ऐसे में आपके पास जो संसाधन उपलब्ध हैं, उनका उपयोग करते हुए आगे बढ़ें।

आइएएस नहीं मिला तो आइआरएस में ही बनाऊंगा करियर

अभिनव ने अपने आइएएस बनने के सपने को साझा किया। बोले, चाईबासा में रहने के दौरान कई तरह की जनसमस्याओं को देखता था। मेरे मन में हमेशा यह विचार आता था कि कुछ ऐसा करुं की आम आदमी की तकलीफ और समस्याओं को दूर कर सकूं। इसके लिए प्रशासनिक सेवा ही सबसे बेहतर उपाय था। 2020 में जब रैक 472 आया तो आईएएस बनने का सपना टूटता दिखा। पुलिस सेवा में जाने की कभी इच्छा नहीं रही। इस वजह से रेवेन्यू सर्विस का चयन किया। अब रैंक अच्छा आया है तो आईएएस में जाने का प्रयास करुंगा अगर सफल नहीं हुआ तो आइआरएस में ही आगे कुछ नया करने की इच्छा है।

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