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ईडी ने अब चिटफंड कंपनी डीजेएन ग्रुप के करोड़ों के ज्वेलर्स प्रतिष्ठान को भी कब्जे में लिया

ईडी ने अब चिटफंड कंपनी डीजेएन ग्रुप के करोड़ों के ज्वेलर्स प्रतिष्ठान को भी कब्जे में लिया

डीजेएन ज्वेलर्स प्राइवेट लिमिटेड रांची के कोतवाली थाना क्षेत्र स्थित लालजी हिरजी रोड के सत्य गंगा आर्केड के ग्राउंड फ्लोर में है- दो दिन पहले भी ईडी ने रांची के डुमरदगा स्थित श्री नारायण इंक्लेव फेज-2 में आरोपित मुख्य प्रबंध निदेशक स्व.जितेंद्र मोहन की 33.74 लाख की संपत्ति को कब्जे में लिया था

रांची,(झारखंड):भारी ब्याज का सपना दिखाकर करोड़ों रुपये की ठगी करने वाली चिटफंड कंपनी डीजेएन ग्रुप की करोड़ों की ज्वेलर्स प्रतिष्ठान को भी प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने गुरुवार को कब्जे में ले लिया। यह प्रतिष्ठान डीजेएन ज्वेलर्स प्राइवेट लिमिटेड के नाम पर है। जिसके संचालक विपिन कुमार बताए गए हैं। यह प्रतिष्ठान रांची के कोतवाली थाना क्षेत्र में लालजी हिरजी रोड के विनोद आश्रम रोड में सत्य गंगा आर्केड के ग्राउंड फ्लोर में है। ईडी ने वहां कब्जा से संबंधित नोटिस चस्पा कर दिया है। इस संपत्ति की कीमत भी करोड़ों में बताई जा रही है। इस संपत्ति की पूर्व में जब्ती हुई थी, जिसपर ईडी की एडजुकेटिंग अथारिटी ने भी सहमति दी थी।

अभी दो दिन पहले ही ईडी ने इस चिटफंड कंपनी डीजेएन ग्रुप के आरोपित मुख्य प्रबंध निदेशक स्व. जितेंद्र मोहन सिन्हा के रांची के डुमरदगा स्थित श्री नारायण इंक्लेव फेज-2 स्थित फ्लैट को कब्जे में लिया था, जिसकी कीमत 33 लाख 74 हजार 390 रुपये बताई गई थी।

ईडी ने इस केस में दो जनवरी 2020 को इस कंपनी से जुड़े 1.66 करोड़ रुपये की संपत्ति को जब्त किया था, जिसपर ईडी की एडजुकेटिंग अथारिटी ने भी सहमति दे दी थी।

प्रवर्तन निदेशालय ने रांची के लालपुर थाने में चिटफंड कंपनी डीजेएन ग्रुप के खिलाफ वर्ष 2016 में दर्ज प्राथमिकी व चार्जशीट के आधार पर कंपनी के मुख्य प्रबंध निदेशक जितेंद्र मोहन सिन्हा, विशाल कुमार सिन्हा, प्रशांत कुमार सिन्हा व इवाटोली संतोष के विरुद्ध मनी लांड्रिंग एक्ट में केस दर्ज किया था। ईडी को अनुसंधान के दौरान यह जानकारी मिली कि डीजेएन कमोडिटिज मुंबई की एमसीएक्स कंपनी से पंजीकृत थी, जिसके प्रोपराइटर विशाल कुमार सिन्हा थे। सभी आरोपितों ने एक साजिश के तहत मिल-जुलकर डीजेएन ग्रुप ने डीजेएन कमोडिटीज (ऑफलाइन) नाम से निवेशकों से रुपयों को ऑनलाइन बिजनेस के नाम पर जमा करवाया। यह झांसा दिया कि प्रति माह उच्च ब्याज देंगे। इसके बाद निवेशकों के पैसे को लेकर फरार हो गए। इस मामले में रांची के लालपुर थाने में भी एक प्राथमिकी दर्ज है, जिसमें इस ग्रुप के आधा दर्जन बड़े पदाधिकारी पकड़े गए थे।

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