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केंद्रीय विद्यालय सिमरिया में गड़बड़ी पर प्रेमलता चन्द्रा ने उपायुक्त से की कार्रवाई की मांग

प्राचार्य पर रिश्वत लेकर बच्चों का एडमिशन करने का लगाया आरोप

चतरा (झारखण्ड) : राष्ट्रीय मानवाधिकार एवं सुरक्षा संगठन की महिला प्रदेश अध्यक्ष प्रेमलता चन्द्रा ने आवेदन देकर उपायुक्त अंजली यादव से केंद्रीय विद्यालय के प्राचार्य पर कार्रवाई की मांग की है। आवेदन में प्रेमलता चन्द्रा ने केंद्रीय विद्यालय के प्राचार्य विजय कुमार पर वर्ष 2021 के नामांकन में अभिभावकों से रिश्वत लेकर तथा गिने चुने लोगों को आरटीई में एवं जेनरल कोटा में नामांकन करने का आरोप लगाया है।

आवेदन में कहा है कि कुछ अभिभावकों की लिखित शिकायत मुझे प्राप्त हुयी है। जिसमें शिक्षा के अधिकार के तहत हुए नामांकन 2021 में प्राचार्य विजय कुमार के द्वारा किए गए गड़बड़ी एवं अनियमितता के आलोक में कार्यवाही के लिए उपायुक्त को लिखित एवं ईमेल पर शिकायत जुलाई, 2021 में समर्पित किया गया था। लेकिन अभिभावकों के अनुसार इन अभिभावकों को जानकारी के नाम पर संस्था के द्वारा जवाब के रूप में मात्र खानापूर्ति करने वाला जवाब दिया गया है। जबकि नामांकन 2021 की प्रक्रिया अगस्त 2021 में बगैर कार्यवाही के समाप्त हो चुकी है।

शिकायत प्राप्त होने के पश्चात जब मैंने केंद्रीय विद्यालय चतरा सिमरिया के वेबसाइट पर जाकर संबंधित जानकारी जैसे लॉटरी रिजल्ट, नामांकन जारी की गई तीनों सूचियां एवं नामांकन पूर्ण की गई सूची का गहन अध्ययन किया तो यह बिल्कुल स्पष्ट प्रतीत हुआ कि प्राचार्य विजय कुमार ने केंद्रीय विद्यालय संगठन चतरा में नामांकन 2021 को अपनी मर्जी के अनुसार तय करते हुए नामांकन लिया है। साथ हीं निकाली गई लॉटरी लिस्ट में ऊपर का क्रमांक को छोड़ सबसे नीचे का क्रमांक के बच्चे को लिया गया है, जो सरासर गलत है।

भुक्तभोगी अभिभावकों के बच्चों की सूची में नाम तथा नामांकन प्रक्रिया के लिए जरूरी सभी दस्तावेजों के रहते हुए भी विजय कुमार ने अपनी मनमानी और स्वार्थ लाभ के लिए इन बच्चों का भविष्य अंधकार में धकेल दिया है। अभिभावकों ने सूचना अधिकार कानून नियम 2005 के माध्यम से कुछ सूचनाएं विद्यालय से मांगी थी, जिसके जवाब में केंद्रीय विद्यालय की वेबसाइट तथा नियम 8(1) (जे) तथा 2 (f) के तहत यह निजी जानकारियां की सूचना नहीं दी जाने का हवाला देकर गुमराह करते हुए जानकारी नहीं दी गयी है। साथ ही, सूचना के अधिकार कानून नियम 2005 में ही धारा 2(f) में कोई भी व्यक्ति सूचना या पूरी जानकारी किसी भी संस्था व कार्यालय से ले सकता है। इसका उल्लेख विद्यालय बेबसाइट में किया गया है।

सिमरिया प्रखंड के 90% अभिभावक कम पढ़े लिखे तथा डिजिटल जानकारी से अनभिज्ञ हैं। वैसे में डिजिटल दिशा निर्देश व जानकारियों को एक आम आदमी को जानना बड़ा मुश्किल है। अभिभावकों के अनुसार प्राचार्य का व्यवहार भी अभिभावकों के साथ ऐसा है, जैसे केंद्रीय विद्यालय संगठन उन्हीं की व्यक्तिगत संपत्ति एवं संस्था है और वह संगठन का अकेला मालिक है। जो जिसके साथ जैसा चाहे वैसा व्यवहार कर सकें। शायद अभिभावकों के अनुसार इन पर किसी का नियंत्रण नहीं है। जिससे केंद्रीय विद्यालय संगठन की छवि को धूमिल कर रही है।

आगे लिखा गया है कि केंद्रीय विद्यालय संगठन के प्राचार्य पर जांचों उपरांत कार्रवाई किया जाए। साथ ही, 2021 नामांकन में की गयी आरटीई में रिश्वत के बल पर एडमिशन को गहनता से जांच किया जाए और दोषी प्राचार्य पर अविलंब कार्रवाई किया जाए, ताकि विद्यालय की साख बनी रहे। इसके अलावा डीडीसी चतरा, एसडीओ सह वीएमसी मेंबर सिमरिया, एचओ केंद्रीय विद्यालय संगठन नई दिल्ली, राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं राष्ट्रीय महासचिव राष्ट्रीय मानवाधिकार एवं सामाजिक सुरक्षा संगठन रांची व दिल्ली को भी प्रतिलिपि प्रेषित की गयी है।

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