ताज़ान्यूज़शिक्षा

रांची : कोतवाली में खुले बाल मित्र थाना का उद्देश्य नहीं हो पा रहा पूरा

बच्चों को समाज की मुख्यधारा से जोड़ने के लिए खोला गया था बाल मित्र थाना

रांची (झारखण्ड) : राजधानी रांची स्थित कोतवाली थाना परिसर में अक्टूबर, 2020 को बाल मित्र थाना खोला गया था। भटके हुए बच्चों को सुरक्षित वातावरण में रखते हुए उन्हें अपराध के रास्ते पर बढऩे से रोकने और अपराध की तरफ झुकाव रखने वाले बच्चों को समाज की मुख्यधारा से जोड़ने के उद्देश्य से बाल मित्र थाने की स्थापना की गई थी। हालांकि, जिस उद्देश्य को लेकर बाल थाने की नींव रखी गई थी, वह पूरा नहीं हो पा रहा है। कई मामलों का निपटारा कोतवाली थाने के स्तर से ही हो जाता है।

एक साल में सिर्फ दो मामलों में ही दर्ज हुआ एफआईआर

कोतवाली में बाल मित्र थाना खुले लगभग एक साल हो गए हैं। इस दौरान थाने में सिर्फ दो मामले को लेकर ही एफआईआर दर्ज हुई है। जुलाई, 2021 में मारपीट और चाकूबाजी के मामले में 14 से 17 वर्ष की उम्र के तीन बच्चों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करायी गई थी। वहीं, अगस्त में एक दुकान में घुसकर चोरी करने के अपराध में दुकान मालिक द्वारा दर्ज कराए गए एफआईआर के आधार पर 13 से 15 वर्ष की उम्र के तीन बच्चों को पकड़ा गया था। दोनों ही मामलों में अपराध की ओर बढ़ते इन बच्चों को डुमरदगा में जेजेएम कोर्ट में पेश किया गया था, जहां से उन्हें बाल संरक्षण गृह भेज दिया गया।

चार भटके बच्चों को सही राह पर लाने का प्रयास

अब तक इस थाने से अपराध की राह पर चल पड़े चार बच्चों को समझा-बुझाकर सही राह पर लाने का प्रयास किया गया है। इन बच्चों की उम्र 13 से 17 वर्ष के बीच थी। सभी को चोरी के मामले में पकड़ा गया था। दो बच्चों के अभिभावकों के बाल मित्र थाने में पहुंचने पर उन्हें समझा-बुझाकर अभिभावकों को सौंप दिया गया, जबकि दो बच्चों के अभिभावकों के नहीं पहुंचने की स्थिति में उन्हें सीडब्ल्यूसी को सौंप दिया गया था। हालांकि, बाद में उनके अभिभावक वहां गए थे।

कोतवाली में तैनात हैं एक बाल कल्याण अधिकारी

कोतवाली अंतर्गत बाल मित्र थाना के लिए एक बाल कल्याण अधिकारी को तैनात किया जाता है। फिलहाल, इस थाने की बाल कल्याण अधिकारी दीपाली महली हैं। भटके बच्चों को रखने के लिए बनी कमरे की दीवारों पर कार्टून बनाए गए हैं। फिलहाल खेलने और पढऩे की सुविधा नहीं है। वहीं रूम के बाहर वाली दीवार में बाल कल्याण अधिकारी के अलावा जिला बाल संरक्षण इकाई के पदाधिकारियों के नाम, पदनाम और मोबाइल नंबर भी अंकित हैं। साथ ही, बच्चों को लेकर बने कानून की जानकारी भी थाने की दीवारों पर अंकित की गई है।

चार-पांच घंटे ही रखे जाते हैं बच्चे

पकड़े गए बच्चे को बाल मित्र थाने में चार-पांच घंटे से अधिक नहीं रखा जाता है। इस दौरान तैनात पुलिसकर्मी सादी वर्दी में उस बच्चे से मिलते हैं। ताकि उसके अंदर का डर चला जाए। ऐसे बच्चों से बात कर उनके विषय में पूरी जानकारी ली जाती है और उसे पूरा फ्रेंडली माहौल देने का प्रयास किया जाता है। उसके लिए भोजन की व्यवस्था भी की जाती है। उसके बाद बाल थाना सीडब्ल्यूसी को उक्त बच्चे को सौंप दिया जाता है। वहां से बच्चे को चाइल्ड लाइन भेज दिया जाता है। अगर किसी बच्चे के अभिभावक आते हैं, तो उन्हें समझा-बुझाकर बच्चों को सौंप दिया जाता है।

कोट-
बाल मित्र थाने का कांसेप्ट केस दर्ज करने के लिए तो बिल्कुल ही नहीं है। बाल थाने का उद्देश्य अपराध की राह पर चलने वाले बच्चों को फ्रेंडली माहौल में रखकर उन्हेंं मुख्यधारा से जोड़ना है। सौरभ, सिटी एसपी, रांची

Tags

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Adblock Detected

Please consider supporting us by disabling your ad blocker