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झारखंड:नवरात्र शुरू होने में एक सप्ताह की है देर,लेकिन झारखंड के नगर मंदिर में 16 दिवसीय नवरात्र हो गया शुरू….

16 दिवसीय नवरात्र के पहले दिन दर्शन व पूजन के लिए मंदिर में उमड़े लोग

स्पेशल न्यूज डेस्क, नई दिल्ली : देवी दुर्गे उमा विश्व जननी रमा माता तू तारा, एक जगदंबा तेरा सहारा…। माता के ऐसे ही भजनों से गूंजने लगा है झारखंड राज्य में लातेहार जिले के चंदवा प्रखंड स्थित मां उग्रतारा नगर मंदिर। मंदिर में गुरूवार से 16 दिवसीय नवरात्र अनुष्ठान शुरू हो गया। मंदिर के पुजारियों ने बताया कि मंदिर में जिउतिया व्रत के पारण के दिन कलश स्थापना की परंपरा मंदिर में रही है। 16 दिवसीय पूजन के बाद विजयादशमी के दिन मां भवगती को पान चढ़ाया जाता है। आसन से पान गिरने के बाद यह समझा जाता है कि भगवती की ओर से विसर्जन की अनुमति मिल गई है तब विसर्जन होता है। इस दौरान हर दो दो मिनट पर आरती की जाती है। कभी कभी तो पूरी रात पान नहीं गिरता और आरती का दौर निरंतर जारी रहता है। पान गिरने के बाद विसर्जन की पूजा होती है। मंदिर में झारखंड, बिहार, बंगाल, ओड़ीसा, मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश, दिल्ली, सिक्किम समेत अन्य स्थानों से श्रद्धालु बड़ी संख्या में पूजन के लिए आते हैं।

राजा को मिली थीं मूर्तियां

स्थानीय लोग बताते हैं कि मंदिर सैकड़ों वर्ष पुराना है। उस समय के तत्कालीन राजा आखेट के लिए लातेहार के मनकेरी जंगल में गए थे, यहां जोड़ा तालाब में पानी पीने के दौरान देवियों की मूर्तियां राजा के हाथ में आ जा रही थीं। लेकिन राजा मूर्तियों को तालाब में ही डाल दिए, तभी भगवती ने रात में राजा को स्वप्न दिया और मूर्तियों को महल में लाने को कहा। इसके बाद तालाब से मूर्तियों को लेकर राजा अपने महल में पहुंचे और आंगन में मंदिर का निर्माण करा दिया।

राज दरबार की तरह मंदिर की व्यवस्था

जिस प्रकार एक राज दरबार में व्यवस्था होती थी वैसी ही व्यवस्था तत्कालीन राजा ने मंदिर के लिए बनाई थी। यह व्यवस्था आज भी कायम है मंदिर में हर कार्य के लिए कर्मचारियों की नियुक्ति की गई थी। इसके लिए राजा ने सभी को जमीन दान में दिया था। इसके बाद से पीढ़ी दर पीढ़ी कर्मचारी मंदिर के कार्यों के निर्वहन कर रहे हैं।

सालों भर लगता है चावल-दाल का भोग

रहस्य और प्राचीनता की चादर ओढ़े इस मंदिर में एक और अनोखी बात है कि यहां 365 दिन मां भगवती को चावल दाल का भोग लगाया जाता है एक तय मात्रा में बनने वाला भोग मंदिर आने वाले श्रद्धालुओं को प्राप्त होता है। इसके लिए दोपहर में मां भगवती को पूजारी उठाकर रसोई में ले जाते हैं यहां भोग लगने के बाद भगवती को वापस मंदिर में आसान पर ग्रहण कराया जाता है।

चंदवा के युवक पदयात्रा कर दर्शन को पहुंचे

16 दिवसीय नवरात्र शुरू होने को लेकर स्थानीय युवाओं में चरम पर उत्साह नजर आया। कोरोना नियमों का पालन करते हुए चंदवा के युवक अंकित कुमार, आदर्श रविराज, सचिन कुमार समेत अन्य लोग चंदवा से पदयात्रा करते हुए दस किमी की दूरी तय कर माता के मंदिर पहुंचे। मंदिर में दर्शन व पूजन कर सुख, शांति व समृद्धि की कामना की। युवाओं ने बताया कि मां की महिमा अपरंपार है माता के दरबार में आने से असीम सुख की प्राप्ति होती है।

मंदिर पहुंचने के लिए ऐसे पहुंचे

इस मंदिर में रेलमार्ग द्वारा चंदवा के टोरी स्टेशन पर आना होगा। इसके यात्री बस या निजी वाहनों द्वारा सड़क मार्ग से दस किमी की दूरी तय कर मंदिर जाया जा सकता है। सुबह में मंदिर खुलने के बाद पूजन की प्रक्रिया पूर्ण होने के बाद दोपहर 12:30 बजे बंद हो जाता है। पुन: शाम 4:30 में मंदिर का पट खुलता है और शाम की आरती के बाद बंद हो जाता है।

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