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तीन दिनों में नहीं मिली रिपोर्ट, हो गई ब्लैक फंगस के संदिग्ध रोगी की मौत

धनबाद के गोविंदपुर की रहनेवाली थी मृतका पुतुली देवी, रिम्स में हुई मौत

रांची (झारखण्ड) : रिम्स में ब्लैक फंगस (म्यूकर माइकोसिस) के संदिग्ध मरीज का शनिवार को इलाज के दौरान मौत हो गई। मरीज के ब्लैक फंगस की रिपोर्ट तीन दिनों में नहीं मिली और रिपोर्ट का इंतजार करते महिला ने दम तोड़ दिया। 58 वर्षीय पुतुली देवी को ब्लैक फंगस के लक्षण को देखते हुए उसे न्यू ट्रॉमा सेंटर में भर्ती कराया गया था। जहां उनका इलाज कर रही डॉ. सीके बिरूआ ने बताया कि ब्लैक फंगस की जांच की जा रही थी, लेकिन महिला की स्थिति ठीक नहीं थी. यहां प्रारंभिक जांच में ब्लैक फंगस के लक्षण दिखने के बाद इलाज शुरू हुआ था, लेकिन उसे बचाया नहीं जा सका। गोविंदपुर धनबाद की रहनेवाली पुतुली देवी को पहले मटकुरिया स्थित ट्रेनक्विल अस्पताल में भर्ती कराया गया था, जहां स्थिति नियंत्रित नहीं होने के कारण उसे रिम्स रेफर कर दिया गया था। इसके बाद महिला को 29 सितंबर को रिम्स में भर्ती कराया गया और दो अक्तूबर को उसकी मौत हो गई। माइक्रोबायलॉजी के विभागाध्यक्ष डॉ. मनोज बताते हैं कि सैंपल आने के बाद उसी दिन रिपोर्ट दे दी जाती है। अगर माइक्रोस्कोपिक जांच में फंगस की पुष्टि नहीं होती है तो उसका कल्चर कराया जाता है, जिसमें दो दिन तक का वक्त लग सकता है।

राज्य में अब ब्लैक फंगस का एक मरीज ही है इलाजरत

ब्लैक फंगस के मरीज लगातार ठीक हो रहे हैं। राज्य में अब सिर्फ एक ब्लैक फंगस का मरीज रिम्स में इलाजरत है। दूसरे जिलों में एक भी ब्लैक फंगस का मरीज नहीं बचा है। रिम्स में पिछले सप्ताह चार मरीज भर्ती थे, जिसमें से तीन मरीजों की पिछले दो दिनों में छुट्टी हो गई और अब वे पूरी तरह से स्वस्थ भी हैं। रिम्स के डा डीके सिन्हा बताते हैं कि कोरोना के दूसरे चरण में ही ब्लैक फंगस के मरीजों की संख्या बढ़ती गई थी. इस बीच ब्लैक फंगस के मरीजों को देखना एक बड़ी चुनौती थी, लेकिन लगातार डाक्टरों ने स्थिति को काबू में किया और आज तीन माह के बाद अस्पताल में सिर्फ एक मरीज ही बचे हैं। उसकी स्थिति भी फिलहाल स्थिर है।

ब्लैक फंगस से अब तक 29 मौत हो चुकी है

सूबे में ब्लैक फंगस से अब तक 29 मौत हो चुकी है। इसके बाद अब ब्लैक फंगस के एक संदिग्ध रोगी की मौत हुई। इससे पहले रिम्स में ही जुलाई को मरीज उषा की मौत हुई थी। इस मरीज के इलाज को लेकर कोर्ट ने रिम्स को फटकार भी लगायी थी, जिसमें पूछा गया था कि उसे बाहर भेजने के बजाए उसका ऑपरेशन रिम्स में क्यों नहीं किया जा रहा है। इसके बाद प्रबंधन ने बिना किसी पुख्ता तैयारी के मरीज का ऑपरेशन कर दिया और ऑपरेशन के तीन दिन के अंदर ही मरीज की मौत हो गई। इस घटना के बाद कई संगठनों ने भी प्रबंधन पर सवाल उठाए थे और मामला कोर्ट तक भी पहुंचा था।

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