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धनबाद : जाम से मुक्ति दिलाने के लिए 2 अक्टूबर को चलेगा आमलोगों का हस्ताक्षर अभियान

जाम से त्रस्त धनबाद के आम नागरिकों का फूटा गुस्सा

लोगों ने बनाया-“मैं हूं धनबाद ग्रुप”, एक माह पहले चला था ट्विटर अभियान

प्रशासन और सरकार की कुंभकर्णी निद्रा तोड़ने का प्रयास

धनबाद (झारखण्ड) : गया पुल समेत धनबाद के अन्य इलाकों में आए दिन जाम की समस्या से लोगों को दो-चार होना पड़ता है। इसमें आम जनता सबसे अधिक पिसती है। बार-बार गुहार लगाने के बाद भी उम्मीद की किरण न देख आम जनता अपने तरीके से तनप्रतिनिधियों और प्रशासनिक अमला को जगाने की प्रयास कर रही है। एक माह पहले महज कुछ घंटों में धनबाद की आम जनता ने बिना गया पुल के जाम को लेकर ट्विटर पर अभियान छेड़ा था। 11 हजार से अधिक ट्वीट हुए। आम लोगों को उम्मीद की एक किरण दिखी। बस फिर क्या था, अब एक बार फिर से यही आम जनता- “मैं हूं धनबाद” टैगलाइन के साथ दो अक्टूबर गांधी जयंती के दिन हस्ताक्षर अभियान चलाने जा रही है। रणधीर वर्मा चौक पर सुबह 11 बजे यह आयोजन होगा।

कार्यक्रम का समन्वय कर रही पूजा रत्नाकर ने बताया कि लगभग 100 पन्ने में हस्ताक्षर कराने का लक्ष्य रखा गया है। हम कोई राजनीति नहीं कर रहे हैं। हमारे साथ हर वर्ग के लोग जुड़े हैं, जो आए दिन जाम की समस्या से जूझ रहे हैं। युवा, कामकाजी-घरेलू महिलाएं, पुरुष, बुजुर्ग, वकील, चिकित्सक, कालेज छात्र-छात्राएं, सब शामिल हैं। कार्यक्रम उद्देश्य सिर्फ प्रशासनिक और जनप्रतिनिधियों को उनकी जिम्मेवारियों का अहसास दिलाना है।

दीपक कुमार झा ने इस अभियान की सफलता और अधिक से अधिक लोगों को हस्ताक्षर अभियान में शामिल होने के लिए ट्वीट किया है कि दो अक्टूबर गांधी जयंती के पावन अवसर पर धनबाद के विकास हेतु हस्ताक्षर अभियान में आप सभी अपना एक हस्ताक्षर धनबाद के नाम अवश्य करें। आने वाली पीढ़ी सदा याद रखेगी। आप अपना हस्ताक्षर धनबाद के विकास के लिए देंगे। अभी नहीं तो कभी नहीं। धनबाद की जनता नया फ्लाईओवर चाहती है।

आम जनता में है काफी गुस्सा

उम्मीदों और सपनों का प्रगतिशील शहर धनबाद, जिसे कोयले की राजधानी के रूप में जाना जाता है, आज ट्रैफिक जाम की विकट परिस्थिति से त्रस्त है। सर्वाधिक बुरी स्थिति है- संकरे गया पुल की। यह शहर के दो प्रमुख भागों को जोड़ता है। बरसात में यहां पानी भर जाता है। बारिश के समय इन गड्ढों को भरकर खानापूर्ति कर ली जाती है। जैसे ही जलजमाव होता है, सड़क टूटनी शुरू हो जाती है।

शहर की प्राय: सभी सड़कों का हाल बुरा है। आम नागरिकों को रोजमर्रा की जिंदगी में काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। इस मुहिम से सक्रिय तौर पर जुड़ी पूजा रत्नाकर, राहुल सिंह, वंदना, राकेश झा, दीपक झा, रितेश कुमार ने सभी धनबादवासियों से अनुरोध किया है कि अभियान में बढ़ चढ़कर हिस्सा लें और खुल कर सरकार तक अपनी बात पहुंचाएं। ताकि धनबाद के निद्रामग्न अधिकारी इस पर उचित कार्यवाही करने के लिए बाध्य हों।

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