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पलामू में नदियों के कटाव से हर साल हजारों एकड़ कृषि भूमि नदी में समाहित,जनप्रतिनिधियों के आश्वासन का नहीं दिखा असर

पलामू में नदियों के कटाव से हर साल हजारों एकड़ कृषि भूमि नदी में समाहित,जनप्रतिनिधियों के आश्वासन का नहीं दिखा असर

पलामू,(झारखंड):पलामू जिला सूखा प्रभावित जिला है। बावजूद बरसात में बाढ़ का पानी कहर साबित होता है। सोन ,काेयल व अमानत नदी में आई बाढ़ से हर साल नदी के किनारों का जबर्दस्त कटाव होता है। बावजूद बचाव के अब तक कोई उपाय नहीं हुए है। इस कारण इस वर्ष भी तटवर्ती गांव के लोगों को इन नदियों में आई बाढ़ के खतरे का सामना करना पड़ेगा। पलामू जिला अंतर्गत हुसैनाबाद अनुमंडल क्षेत्र के कादलकुर्मी से शुरु होकर दंगवार गांव तक 30 किलोमीटर क्षेत्र में 15 किलोमीटर में कोयल व 15 किलोमीटर क्षेत्र में सोन नदी बहती है। कोयल व सोन नदियों के तटवर्ती इलाके के किसान इस बात को लेकर चिंतित हैं कि हर साल लगातार उनकी कृषि योग्य भूमि का कटाव तेजी हो रहा है। आने वाले दिनों में तटबंध की व्यवस्था नहीं हुई तो उनके पास कुछ भी नहीं बचेगा। अब तक इन क्षेत्रों की करीब कई हजार एकड़ भूमि नदी में समाहित हो चुकी है।

कटाव से यह गांव है प्रभावित

पलामू में सोन नदी के कटाव से कबरा कला, कबरा खुर्द, परता, सजवन, सोनपुरवा, देवरी, घोडबंधा, बुधुआ, शिवा बिगहा, डुमर हथा व दंगवार गांव शामिल हैं। वर्ष 2008 में झारखंड सरकार जल संसाधन विभाग के अभियंताओं ने कटाव वाले इलाकों का दौराकर तटबंध निर्माण के लिए सर्वे किया था। दंगवार इलाके के कुछ भाग में बोल्डर पिचिंग का काम कराकर कटाव को रोकने का भी काम किया गया था। इसके बाद आजतक इस दिशा में कोई पहल नहीं की गई। पूर्व के कई जनप्रतिनिधियों ने भी किसानों को आश्वासन दिया था कि नदियों के कटाव वाले इलाके को चिंह्नितकर तटबंध की व्यवस्था की जाएगी। आजतक इस दिशा में कुछ होता नहीं दिखा। जिला परिषद के पूर्व उपाध्यक्ष सह जिप सदस्य विनोद कुमार सिंह के आश्वासन के बाद किसानों की आस बंधी थी। उनके 5 साल का कार्यकाल खत्म हो जाने के बावजूद अब तक कोई पहल नहीं हुई।इधर कोयल नदी के कटाव से चैनपुर प्रखंड के कनकारी, शाहपुर, बिश्रामपुर प्रखंड के तोलरा रेहला, उंटारी रोड प्रखंड के सतबहिनी आदि गांव में कटाव जारी है।

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