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पलामू : वरदान बना मानसिक स्वास्थ्य अस्पताल, यूपी, छतीसगढ़, बिहार व बंगाल के लोगों का हो रहा इलाज

हर साल औसतन 13 हजार रोगियों का होता है इलाज, अस्पताल की बन गई है अलग पहचान

पलामू (झारखंड) : उग्रवाद व नक्सलवाद से जूझने व पिछड़ेपन पर धीरे-धीरे काबू पा चुके पलामू जिला मानसिक स्वास्थ्य के मामले में झारखंड समेत पड़ोसी राज्यों के लिए वरदान साबित हो रहा है। पलामू प्रमंडल मुख्यालय मेदिनीनगर के मेदिनीराय मेडिकल कालेज अस्पताल परिसर स्थित जिला मानसिक अस्पताल अब अलग पहचान बना चुका है। हर साल पलामू प्रमंडल समेत अन्य राज्यों के दूरदराज से आने वाले रोगियों की संख्या बढ़ रही है। औसतन हर माह 110-120 नए मानसिक रोगियों की संख्या बढ़ी है। अस्पताल प्रबंधन के मुताबिक हर साल 15 से 17 प्रतिशत मानसिक रोगियों की संख्या बढ़ी है। पहले यह 10 से 12 प्रतिशत थी।

इस मानसिक अस्पताल में झारखंड के पलामू, गढ़वा, लातेहार, चतरा, रांची जिला समेत बिहार, उतरप्रदेश, छत्तीसगढ़ व बंगाल के मानसिक रोगी इलाज कराने आते हैं। इसमें अधिकांश मरीज मानसिक रूप से स्वस्थ भी हो रहे हैं। इस मानसिक स्वास्थ्य केंद्र में फिलवक्त 12096 रोगी पंजीकृत है। इनमें 80 प्रतिशत रोगी पलामू प्रमंडल व 20 प्रतिशत रोगी बिहार, उतरप्रदेश, छतीसगढ़ व बंगाल के पंजीकृत हैं। इनमें पलामू में 40 प्रतिशत, गढ़वा में 25 प्रतिशत व लातेहार जिले के 15 प्रतिशत रोगियों का इलाज इस अस्पताल में हो रहा है। अस्पताल में प्रतिवर्ष औसतन इलाजरत मानसिक रोगियों की संख्या 13 हजार पहुंच जाती है। इस अस्पताल में प्रतिदिन 7 से 9 नए मानसिक रोगियों का पंजीकरण किया जा रहा है। इस तरह नए मानसिक रोगियों का सालाना औसत 2900 है।

मालूम हो कि हर साल इस अस्पताल में औसतन 13700 मानसिक रोगियों का इलाज हो रहा है। अस्पताल प्रबंधन के मुताबिक इलाजरत रोगियों में 35 प्रतिशत जटिल मानसिक रोग के शिकार होते हैं। शेष 65 प्रतिशत सामान्य मानसिक रोगी। इनमें 3 से 4 प्रतिशत रोगियों को इलाज के लिए रांची रिनपास रेफर किया जाता है। रोगी की दवा व भर्ती के लिए रिनपास भेजा जाता है। इस अस्पताल में बिहार के गया, औरंगाबाद व रोहतास जिला, उत्तर प्रदेश के सोनभद्र जिला व छतीसगढ़ के अंबिकापुर, बलरामपुर-रामानुजगंज जिला, बंगाल समेत झारखंड के पलामू प्रमंडल समेत चतरा व रांची जिला के रोगी यहां इलाज कराने आते हैं।

क्या कहते हैं प्रभारी मनोचिकित्सा पदाधिकारी

पलामू जिला मानसिक स्वास्थ्य केंद्र के प्रभारी मनोचिकित्सा पदाधिकारी डॉ. आशीष कुमार ने मोबाइल पर बताया कि अशिक्षा व कलंक बोध, अत्यधिक नशापान, तनाव, बेरोजगारी आदि के कारण मानसिक रोगियों की संख्या बढ़ी है। समय पर इलाज नहीं कराना भी एक मुख्य कारण है। युवा वर्ग में मोबाइल व इंटरनेट का बेवजह इस्तेमाल करने से मानसिक रोगी बढ़े हैं। मानसिक रोगियों के लिए इस अस्पताल में दवा उपलब्ध है। 3-4 प्रतिशत रोगी रांची स्थित रिनपास रेफर किए जाते हैं।

क्या कहते हैं नैदानिक मनोवैज्ञानिक

मानसिक रोग का इलाज संभव है। कोरोना काल की वजह से मानसिक रोगियों की संख्या बढ़ी है। बेरोजगारी, परिवार के सदस्यों की अचानक मौत, घरेलू हिंसा, नशापान, तनाव आदि के कारण मानसिक रोगियों की संख्या बढ़ रही है। परिवार के लोग मानसिक रोगियों के प्रति सकारात्मक सोच रखें। सही ढंग से इलाज कराएं। उसका पूरा ख्याल रखें। डॉ. सुनील शाहदेव, नैदानिक मनोवैज्ञानिक, मानसिक अस्पताल, एमआरएमसीएच, मेदिनीनगर।

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