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पेयजल एवं स्वच्छता प्रमंडल तैयार कराएगा डीपीआर,सोलह गांवों में पाइप लाइन के माध्यम से होगी आपूर्ति

घर-घर में शुद्ध जल मुहैया कराने की योजना पर सुस्ती का ग्रहण

जमीन का अनापत्ति पत्र देने में विलंब कर रहा अंचल कार्यालय, खतियान उपलब्ध नहीं होने का बना रहा बहाना

पेयजल एवं स्वच्छता प्रमंडल तैयार कराएगा डीपीआर, सोलह गांवों में पाइप लाइन के माध्यम से होगी आपूर्ति

चतरा,(झारखंड):हंटरगंज प्रखंड के सोलह गांवों को शुद्ध पेयजल उपलब्ध कराने की योजना पर सुस्ती का ग्रहण लगा हुआ है। संबंधित जमीन की अनापत्ति देने में अंचल कार्यालय के असहयोग से यह नौबत आई है। संबंधित राजस्व उपनिरीक्षक खतियान उपलब्ध नहीं होने का बहाना बना कर टाल मटोल कर रहे हैं। जानकारी के मुताबिक उन गांवों में पाइप लाइन के माध्यम से शुद्ध पेयजल मुहैया कराना है। उनमें से उरैली और गोसाईडीह में 12 गुणा 120 मीटर जमीन पर योजना का निर्माण किया जाना है। बाकी गांवों में 25 गुणा 25 मीटर भूमि पर योजना निर्माण प्रस्तावित है। इसके लिए उरैली गांव में खाता नंबर 54, प्लाट नंबर 45, पंडरीकलां में खाता नंबर 72, प्लाट नबर 395 और धरधरा में खाता 116, प्लाट नंबर 19, बलुरी पंचायत के नोनिया चुआं में खाता नंबर 9, प्लाट नंबर, कोबना पंचायत के डाहा में खाता नंबर 158, प्लाट नंबर 932, दंतार पंचायत के लेढ़हो में खाता नंबर 4, प्लाट नंबर 15, गारा में खाता नंबर 1, प्लाट नंबर 6, जोलडीहा पंचायत के बेलवाडीह में खाता नंबर 6, प्लॉट नंबर 395, नावाडीह पंचायत के देवनवार में खाता नंबर 6, प्लाट नंबर 37/38, गोसाईडीह पंचायत के गोसाईडीह में खाता नंबर 2, प्लाट नंबर 15, मीरपुर पंचायत के शेरपुर मे खाता नंबर 16, प्लाट नंबर 57, पनारी नवाडीह पंचायत में पनारी नावाडीह के खाता नंबर 57, प्लाट नंबर 584, जबडा़ पंचायत के गंगटा में खाता नंबर 1, प्लाट नंबर 187, डाहा पंचायत के डाहा में खाता नंबर 78, प्लाट नंबर 9, बेला में खाता नंबर 2, प्लाट नंबर 3 और करमा के बसरिया में संबंधित भूमि पर योजना प्रस्तावित है। चतरा स्थित पेयजल एवं स्वच्छता प्रमंडल के कार्यपालक अभियंता ने अपने पत्रांक 650 दिनांक 16-7-2021 के माध्यम से हंटरगंज अंचल अधिकारी से उपर्युक्त भूमि पर अनापत्ति प्रमाण पत्र मांगा है। मगर डेढ़ माह बीत जाने के बाद भी अनापत्ति प्रमाण पत्र उपलब्ध नहीं कराया जा सका है। जब इस संदर्भ में संबंधित पंचायत के कुछ कार्यकारी प्रधानों (निवर्तमान मुखिया) ने राजस्व उपनिरीक्षकों से संपर्क किया तो उन्होंने कहा कि उनके पास संबंधित गांव का खतियान उपलब्ध नहीं है। यहां बताना लाजिमी है कि राजस्व उपनिरीक्षकों को संबंधित गांवों का सर्वे खतियान, पंजी दो, रसीद वौल्युम और नक्शा का ही प्रभार दिया जाता है। अब चूंकि जमीन की रसीद आनलाइन निर्गत होने लगी है इसलिए उनके पास बाकी कागजात उपलब्ध होना चाहिए।ऐसे में यह माना जा रहा है कि राजस्व उपनिरीक्षक बहाना बनाकर इस महात्वाकांक्षी योजना को लटका रहे हैं। इस संदर्भ में पूछे जाने पर हंटरगंज अंचल अधिकारी मिथिलेश कुमार सवाल को टालते रहे। वह बार-बार सहयोग का राग अलापते रहे।

चयनित परामर्शी तैयार करेंगे डीपीआर, सौ करोड़ की लागत आने का अनुमान:

पेयजल एवं स्वच्छता प्रमंडल, चतरा के कार्यपालक अभियंता राजमोहन सिंह ने बताया कि इन प्रस्तावित आच्छादन ग्रामीण पाइप लाइन जलापूर्ति योजनाओं का डीपीआर चयनित परामर्शी से तैयार कराना है। इनमें तीन प्रकार की योजनाएं हैं। एक नदी से जल लेकर संयत्र में शुद्ध बनाकर जलमीनार तक पहुंचाया जाएगा और फिर उसे पाइप लाइन के माध्यम से ग्रामीणों को आपूर्ति की जाएगी। यह योजना बडे़ बजट की होगी। इसी प्रकार पहाडी़ नालों को बांध कर उसका पानी संयंत्र में शुद्ध कर जलमीनार तक पहुंचाया जाएगा। फिर पाइप के माध्यम से ग्रमीणों को मुहैया करा दिया जाएगा। तीसरी योजना डीप बोरिंग के माध्यम से उपलब्ध पानी को संयंत्र में शुद्ध कर ग्रामीणों को मुहैया कराने की है। इन पर तुलनात्मक कम लागत आएगी। हालांकि योजनाओं की वास्तविक लागत राशि के संदर्भ बताना तत्काल संभव नहीं है। फिर भी सौ करोड़ रुपये से ज्यादा की लागत आने का अनुमान है। योजना का डीपीआर बनाने, उनके निर्माण और चालू होने में कम से कम तीन साल लग जाएंगे। यदि संबंधित भूमि का अनापत्ति पत्र देने में विलंब किया गया तो लाजिमी तौर योजना को जमीन पर उतारने में देर होगी।

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