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बगैर सिविल सर्जन के चल रहा खूंटी का स्वास्थ्य विभाग, कामकाज प्रभावित

सिविल सर्जन नहीं रहने के कारण बंद है वेतन निकासी, कर्मियों को डर कैसे बीतेगा पर्व-त्योहार

प्रभारी सीएस का नहीं है वित्तीय प्रभार, एंबुलेंस में डीजल भरवाने पर भी आफत

खूंटी (झारखण्ड) : खूंटी जिला के सदर अस्पताल में सिविल सर्जन का पद विगत एक महीने से खाली है। इसके कारण कामकाम पर असर पड़ रहा है। सिविल सर्जन नहीं रहने के कारण चिकित्सा संबंधी निर्णय लेने में प्रभारी सिविल सर्जन को दिक्कत हो रही है। उन्होंने कहा कि खूंटी जिला अति संवेदनशील जिला है, जहां आकस्मिक दुर्घटनाएं होती रहती हैं। दुर्घटना होने पर प्रभारी सिविल सर्जन एंबुलेंस में डीजल तक नहीं भरा सकती। सिविल सर्जन नहीं रहने के कारण चिकित्सा कर्मियों के वेतन भुगतान में भी परेशानी हो रही है।

उन्होंने कहा कि उपाधीक्षक को सिविल सर्जन का प्रभार तो दिया गया, लेकिन वित्तीय अधिकार नहीं दिया गया है। ऐसे में स्वास्थ्य विभाग के कर्मियों का वेतन निकासी भी नहीं हो रहा है। कोरोना संक्रमण के दौर में जिला में सिविल सर्जन का नहीं रहना सरकार व प्रशासन की उदासीनता को दर्शा रही है। करमा और तीज का पर्व खत्म हो गया, लेकिन कर्मचारियों को वेतन नहीं मिला। जिले में अगर जल्द ही सिविल सर्जन की पदस्थापना नहीं हुई तो दुर्गा पूजा में भी स्वास्थ्य कर्मियों को वेतन नहीं मिल पाएगा।

सिविल सर्जन डा साथी घोष 31 अगस्त को सेवानिवृत्त हो गई। उसके बाद सिविल सर्जन की पदस्थापना नहीं हुई। अब जिन्हें सिविल सर्जन का अतिरिक्त प्रभार दिया गया है उन्हें वित्तीय प्रभार नहीं मिला है। इसके कारण अस्पताल के कर्मचारियों को वेतन नहीं मिल पा रहा है। इसको लेकर अब क्षेत्र के राजनीतिक दलों के नेता व समाजसेवी आवाज उठाने लगे हैं।

इस संबंध में खूंटी के समाजसेवी और झाविमो के पूर्व जिलाध्यक्ष दिलीप मिश्रा ने अपर मुख्य सचिव, स्वास्थ्य चिकित्सा शिक्षा एवं परिवार कल्याण विभाग को पत्र लिखकर खूंटी में अविलंब सिविल सर्जन की पदस्थापना की मांग की है। पत्र में मिश्रा ने कहा कि जब तक सिविल सर्जन की पदस्थापना नहीं होती, तब तक उपाधीक्षक को ही वित्तीय प्रभार दिया जाए, ताकि स्वास्थ्यकर्मियों को पर्व-त्योहार के दौरान खाली हाथ न रहना पड़े। उन्हें उनका वेतन मिल सके।

वहीं, झारखंड पार्टी के जिला महासचिव योगेश वर्मा ने भी मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर सदर अस्पताल में सिविल सर्जन की पदस्थापना करने का आग्रह किया है। पत्र में कहा गया है कि डॉ साथी घोष को महज एक महीने के लिए सिविल सर्जन बनाया गया। 31 अगस्त को डॉ घोष सेवा निवृत्त हो गयी। उसके बाद किसी को सिविल सर्जन का वित्तीय प्रभार नहीं दिया गया। इसके कारण अस्पताल के कर्मचारियों को वेतन नहीं मिल पा रहा है।

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