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मातृवंदन योजना की अनियमितताओं की जांच में विभाग लेगा साइबर विशेषज्ञों की मदद

जांच अधिकारी मान रहे- साइबर हैकरों ने की है साइट हैक कर गड़बड़ी

प्राथमिक जांच में करीब छह करोड़ की गड़बड़ी आई है सामने
देना था 901 लाभुकों को लाभ, मिल गया 9526 लोगों को

धनबाद (झारखण्ड) : प्रधानमंत्री मातृवंदन योजना में हुई वित्तीय अनियमितता की जांच करा रहे सामाजिक सुरक्षा विभाग के अधिकारी इसमें साइबर हैकरों की बड़ी भूमिका मान रहे हैं। लिहाजा, इसकी जांच में वे अब साइबर विशेषज्ञों की भी मदद लेंगें। इसके लिए जिला केे अधिकारियों ने राज्य मुख्यालय के अधिकारियों को पत्र लिखकर दिशा निर्देश मांगा है। विभागीय सूत्रों की माने तो इस पूरी गड़बड़ी के पीछे जिले में सक्रिय साइबर फ्राड गिरोह की भूमिका प्राथमिक जांच में सामने आ रही है।

वहीं जांच टीम में शामिल एक अधिकारी ने अपनी पहचान उजागर नहीं करने की शर्त पर बताया कि जांच के दौरान कई लाभुकों के नाम गलत तरीके से सूची में शामिल किए गए हैं। प्रखंडों से आई सूची और विभागीय साइट में दर्ज लाभुकों की संख्या में बहुत बड़ा अंतर है। इसलिए जांच में कई बिंदुओं को शामिल किया गया है। जांच के दौरान गलत तरीके से डाटा की इंट्री करने का भी कुछ मामला आया है। लेकिन अधिकांश नामों को बाद में शामिल करने से साइबर हैकरों के द्वारा गड़बड़ी किए जाने की संभावना दिख रही है। इसलिए इस मामले की तह तक जाने में साइबर विशेषज्ञों की मदद लेने के लिए अधिकारियों से दिशा निर्देश मांगा गया है। इस बारे में पूछे जाने पर जिला समाज कल्याण पदाधिकारी स्नेह कश्यप ने कहा कि जांच की प्रक्रिया अभी जारी है। ऐसे में उनका कुछ कहना ठीक नहीं होगा। हालांकि उन्होंने ना तो इस जानकारी का खंडन किया और ना ही स्वीकार। उन्होंने केवल राज्य मुख्यालय के विभागीय अधिकारियों से दिशा निर्देश मांगे जाने की बात कही।

गौरतलब है कि जिले में इस योजना के अंतर्गत वित्तीय वर्ष 2020-21 के लिए कुल 901 लाभुकों का चयन किया गया था। जिसके लिए प्रखंडों और पंचायतों की अनुसंशा ली गई थी। लेकिन विभागीय वेबसाइट पर लाभुकों की कुल संख्याा 9526 दर्ज हैं। जिसमें करीब 5.71 करोड़ रुपये की वित्तीय अनियमितता का मामला सामने आया है. जिसके जांच होने पर 11 करोड़ रुपये से भी अधिक होने का अनुमान किया जा रहा है.

ऐसे आया पूरा मामला सामने

दरअसल, राज्य मुख्यालय की सालाना आडिट टीम के आने की सूचना पर जब सारे दस्तावेज सही किए जा रहे थे, तभी इस गड़बड़ी का पता चला। क्योंकि सदर प्रखंड की तत्कालीन सीडीपीओ पूर्णिमा कुमारी के यूजर आइडी से अधिकांश डाटा की इंट्री की गई थी। तत्काल इसकी सूचना वर्तमान सीडीपीओ अर्चना सिंह ने 25 अगस्त 2021 को डीसी संदीप सिंह का दी। इसके अलावा डीडीसी दिनेश चंद्र दास और अपर समाहर्ता (विधि-व्यवस्था) एवं राज्य समाज कल्याण विभाग के निदेशक को भी अवगत कराया। जिसके बाद इसकी जांच के आदेश दिए गए।

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