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रिम्स की पहचान उसके शोध कार्य से ही हो सकती है:निदेशक

रिम्स की पहचान उसके शोध कार्य से ही हो सकती है:निदेशक

रांची,(झारखंड):रिम्स रिसर्च मेडिकल एजुकेशन यूनिट के अंतर्गत रविवार को डाक्टरों के लिए बेसिक ऑफ बोयो स्टेटिक्स (सांख्यिकी) पर कार्यशाला का आयोजन किया गया। इस कार्यशाला में रिम्स के विभिन्न विभागों के एचओडी, शिक्षक व सभी डाक्टरों को शोध कार्य को अपनाने और इसे बढ़ाने की जानकारी दी गई। रिम्स निदेशक ने दो दिवसीय इस कार्यशााला का उद्घाटन करते हुए बताया कि रिम्स की पहचान उसके शोध कार्य से हाे सकती है। दुनिया को यह बताना होगा कि यहां पर गुणवक्ता युक्त इलाज ही नहीं होता है बल्कि शोधकार्य को बढ़ाने की दिशा में काम किया जाता है। रिम्स अब शोध की दिशा में परचम लहराएगा और इसकी शुरुआत हो चुकी है। उन्होंने कहा कि अभी कुछ समय से शोध कार्य होने लगे हैं लेकिन अभी भी

इसकी यहां काफी कमी है। डाक्टर दिन-रात मेहनत करते हैं लेकिन वे शोध कार्य को पूरा नहीं कर पाते हैं। उन्होंने बताया कि सांख्यिकी पद्धतियों के उपयोग से आंकड़ों की व्याख्या, वर्गीकरण तथा विश्लेषण किया जाता है ताकि तथ्यों को स्पष्ट किया जा सके।इस कार्यशाला में भाग लेने वाले डाक्टरों की संख्या 50 के उपर रही। आयोजक डा एसबी सिंह ने बताया कि कार्यशाला में भाग लेने के लिए डाक्टरों को ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन करवाना था, जिसके लिए जब लाइन खोली गई तो मात्र छह घंटे में 50 प्रतिभागियों ने भाग ले लिया। उन्होंने बताया कि यह कार्यशाला डाक्टरों के लिए है। यहां इन सभी को शोध के प्रति अधिक से अधिक काम करने के लिए प्रेरित किया जा रहा है।

शोध के लिए सबसे जरूरी है डाटा व प्लानिंग :डा द्विवेदी

कार्यशाला में एम्स दिल्ली से आए मुख्य वक्ता डा एसएन द्विवेदी ने शाेध कार्य में स्टेटिक्स के महत्व को बताया। उन्होंने कहा कि शोध करने से पहले यह जरूरी है कि शोध के क्षेत्र की प्लानिंग अच्छे तरीके से हो सके। शोध की गुणवक्ता को बनाए रखने के लिए सबसे अहम डाटा का होना होता है। क्वालिटी को कैसे मैनेज करें और डाटा को किस तरह से प्रस्तुत करें जैसी बारीकियों को समझने की जरूरत है। इसके बाद ही कोई शोध का परिणाम अच्छा निकलता है और उसे पूरी दुनिया मानती है। उन्होंने सीएमसी वैल्लोर जैसे अस्पताल का उदाहरण देते हुए कहा कि आखिर वो अस्पताल इतना प्रसिद्ध कैसे है इसे समझने की जरूरत है। सीएमसी में हमेशा ही शोध होते रहें है और वे पहले दिन से ही कई देश-विदेश के जरनल और मीडिया में आते रहे हैं, जिस कारण उस अस्पताल को सभी आज जानते हैं।
अन्य वक्ताओं में दूसरे राज्य से आए डा विवेक वर्मा, पीएसएम विभाग रिम्स के डा एसबी सिंह, सहित अन्य डाक्टर मौजूद थे।

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