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लातेहार : अम्बाकोठी मोहल्ला के मैदान में श्रीरामचरितमानस नवाह्न परायण पाठ महायज्ञ के 48वें अधिवेशन का उद्घाटन

महिला-पुरुष श्रद्धालुओं द्वारा निकाली गयी कलश यात्रा, मुख्य यजमान अनिल प्रसाद ने सपत्नीक किया पूजन

लातेहार (झारखण्ड) : लातेहार जिला मुख्यालय के अम्बाकोठी मोहल्ला के मैदान में गुरुवार को श्रीरामचरितमानस नवाह्न परायण पाठ महायज्ञ के 48वें अधिवेशन का उद्घाटन किया गया. इस अवसर पर महिला-पुरुष श्रद्धालुओं द्वारा कलश यात्रा निकाली गई। कलश यात्रा अम्बाकोठी के महायज्ञ परिसर से आरंभ होकर मुख्य मार्ग होते हुए चाणक्य नगरी स्थित औरंगा नदी के तट पर पहुंची, जहां पंडित अनिल कुमार मिश्र ने वैदिक मंत्रोच्चारण के बीच भक्तों के कलश में जल भरवाया। इसके बाद यहाँ से पुनः कलश यात्रा महायज्ञ परिसर पहुंची. यहाँ बतौर मुख्य यजमान अनिल प्रसाद सपत्नीक पूजन किया। कलश यात्रा में शामिल लोगों के बीच प्रसाद का वितरण किया गया। कलश स्थापना के बाद गिरिडीह से चलकर आए अनिल भारद्वाज के द्वारा श्रीरामचरितमानस पाठ की शुरुआत की गई।

ज्ञात हो कि दशहरा में श्रीरामचरितमानस नवाह्न परायण पाठ महायज्ञ से पूरे लातेहार शहर में रौनक बढ़ जाती है. ऐसा आयोजन लातेहार में कहीं और नहीं होता. महायज्ञ के 48वें अधिवेशन के दौरान महायज्ञ समिति द्वारा सरकार के द्वारा जारी किए गए कोविड-19 के गाइड लाइन का पालन किया जा रहा है. इस कार्यक्रम को सफल बनाने में समिति के संरक्षक सह लातेहार विधायक वैधनाथ राम, नगर पंचायत उपाध्यक्ष नवीन कुमार सिन्हा, समिति के अध्यक्ष प्रमोद प्रसाद सिंह, महामंत्री सुदामा प्रसाद गुप्ता, कोषाध्यक्ष विनोद कुमार महलका, कार्यालय प्रभारी विशाल शर्मा, मीडिया प्रभारी चंद्रप्रकाश उपाध्याय, संतोष अग्रवाल, राजू प्रसाद सिंह, मदन प्रसाद, संयुक्त मंत्री सुनील कुमार शौंडिक, मुकेश पांडेय, युवा नेता अंकित पांडेय, मुरली प्रसाद, संतोष अग्रवाल, प्रकाश अग्रवाल, जनार्दन प्रसाद, नागेंद्र प्रसाद समेत कई लोग योगदान दे रहे हैं.

भगवान श्रीराम के गुणों को अपनाएं, तभी आएगा राम-राज्य : वैद्यनाथ

लातेहार जिला मुख्यालय स्थित अम्बाकोठी में श्रीरामचरितमानस नवाह्न  परायण पाठ महायज्ञ के 48वें अधिवेशन का उदघाटन लातेहार विधायक वैद्यनाथ राम ने दीप प्रज्जवलित कर किया. उदघाटन समारोह को संबोधित करते हुए विधायक वैद्यनाथ राम ने कहा कि राम-राज्य लाने के लिए भगवान श्रीराम के चरित्र को आत्मसात करें. उन्होंने कहा कि वर्तमान परिवेश में लोग जब तक स्वार्थ से ऊपर उठकर नहीं सोचेंगे, तब तक राम-राज्य लाना संभव नहीं है. उन्होंने कहा कि मनुष्य की पहचान चरित्र से होती है, न कि पद से। भगवान श्रीराम अपने पिता के वचन को पूरा करने के लिए चौदह वर्षों का वनवास काटा. लेकिन, वर्तमान समय में मामूली विवाद में ही लोग अपने पिता का अपमान करने से नहीं चूकते. उन्होंने सभी लोगों से भगवान श्रीराम के गुणों का अनुसरण करने की अपील की.

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