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लुकूइया बोदा पथ पर ढाई दशक पूर्व बनी पुलिया धंसी,दे रही खतरे का आमंत्रण

लुकूइया बोदा पथ पर ढाई दशक पूर्व बनी पुलिया धंसी,दे रही खतरे का आमंत्रण

इसी ध्ंसी पुलिया से होकर गुजरते हैं बोदा पिकेट के पदाधिकारी और जवान

चंदवा,(झारखंड): प्रखंड के उग्रवाद प्रभावित बोदा लुकुइया पथ पर लगभग ढाई दशक पूर्व बनी पुलिया विगत दिनों हुई बारिश के बाद से लगातार धंसती जा रही है। यह धंसी पुलिया खतरे को आमंत्रण दे रही है। एनएच 39 और चंदवा-चांपी-लोहरदगा पथ के समीप से होकर बोदा जानेवाले ग्रामीण पथ में पुटलंुग टाड़ के समीप बनी पुलिया कुछ दिनों से अंदर ही अंदर धंसती जा रही है। गांव के बसंत गझंू, जगेश्वर गंझू, श्रवण कुमार, रविन्द्र गंझू, दानिश अंसारी, शाहिद अंसारी, अफजल अंसारी समेत अन्य ग्रामीणों की मानें तो यदि यह पूरी तरह धंस गई तो बोदा, बियरजंघा, डुमरचुआं, फूलटाड़, रेड़ादोहर, अंबाटोली समेत अन्य गांवों के ग्रामीणों का संपर्क पूरी तरह मुख्यालय से कट जाएगा। चार दिन पूर्व ग्रामीणों की सूचना पर झामुयुमो प्रखंड अध्यक्ष बबलू राही ने पहल करते हुए एक संवेदक प्रतिनिधि के माध्यम से लोगों को खतरे से बचाने के लिए धंसी पुलिया के साइड में ऊपर में कुछ मिट्टी रखकर लोगों को उधर से गुजरने को लेकर मनाही का प्रयास अवश्य किया गया है मगर पुलिया के अंदर धंस रही मिट्टी कब पूरी तरह धंस जाएगी यह कहना मुश्किल होगा। जिस वक्त यह पूरी तरह घंस जाएगी उसके बाद कई गांवों का संपर्क मुख्यालय से कट जाएगा। ग्रामीण गांवों में कैद होकर रह जाएंगे। सबसे बड़ी बात यह है कि क्षेत्र में उग्रवाद पर निंयत्रण के लिए बोदा पिकेट में तैनाता जवानों को भी मुश्किलों का सामना करना पडे़गा। ग्रामीणों की मानें तो लोग पहले ही बड़ी मुश्किल से पथ पर बने गड्ढों में जमा पानी और कीचड़ से बचते-बचाते किसी तरह शहर पहुंच जरूरत की सामग्री खरीद गांव पहुंच पाते थे। बीमार को सीएचसी पहुंचा पाते थे। इसके धंसने के बाद उतपन्न होनेवाली समस्याओं की सोच के साथ ग्रामीण दहशतजदा हैं। प्रशासन से तत्काल इस पर सार्थक पहल की मांग ग्रामीणों ने की है।

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