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स्टेम सेल थेरेपी से दो सगे भाइयों को मिली जिंदगी

मस्कुलर डिस्ट्रॉफी से पीड़ित हैं युवक

राज अस्पताल में मिलेगी मरीजों को स्टेम सेल की सेवा
रांची (झारखंड) : स्टेम सेल थेरेपी से दो युवकों (सगे भाई) को नई जिंदगी मिली है। दोनों ही एडवांस्ड डयुशैन मस्कुलर डिस्ट्रॉफी से पीड़ित थे। जमुई के रहने वाले दो लड़के पिछले दस वर्षों से थेरेपी करा रहे थे। अब इस थेरेपी के बाद उन्हें नई जिंदगी के साथ उनके मांसपेशियां को नई जान मिली है। इसकी जानकारी राज हॉस्पिटल में आयोजित प्रेसवार्ता में मुम्बई के स्टेम सेल ट्रांसप्लांट सर्जन डॉ बी एस राजपूत ने दी।
डॉ राजपूत ने बताया कि दोनों मांसपेशियों के एक घातक आनुवंशिक रोग से पीड़ित है, जिसके कारण अधिकांश बच्चे 13 से 23 वर्ष की आयु के बीच हृदय और फेफड़ों की विफलता के कारण मर जाते हैं। दोनों लड़के बिहार के निवासी हैं और 2010 से डॉ राजपूत द्वारा उनकी स्टेम सेल थेरेपी की जा रही है ।
गौरतलब है कि पिछले 11 सालों में उनकी तबीयत नहीं बिगड़ी है।
ऑटोलॉगस बोन मैरो सेल ट्रांसप्लांट के रूप में स्टेम सेल थेरेपी एक सर्जिकल प्रक्रिया है, जहां बोन मैरो को कूल्हे की हड्डी से एकत्र किया जाता है। राज हॉस्पिटल के साहिल गंभीर ने बताया कि अब राज हॉस्पिटल में स्टेम सेल थेरेपी की सुविधा मिलेगी। प्रत्येक माह के दूसरे सोमवार को चिकित्सक सेवा देंगे।
 स्टेम सेल थेरेपी , रीजेनरेटिव चिकित्सा का एक हिस्सा है और इसे उच्च तकनीकी उपचार माना जाता है। जो अभी मुंबई और दिल्ली जैसे बड़े महानगरों में उपलब्ध है। लेकिन इसकी सुविधा अब रांची में भी मिलेगी आयुष एवं पीयूष दोनो सगे भाई है और आयुष की शादी भी हो चुकी है और उसकी एक बालिका भी है।
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