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विश्व हाथी दिवस-2022 पर विशेष….

विश्व हाथी दिवस-2022 पर विशेष….

झारखंड में बेतला हाथियों का सबसे बड़ा बसेरा, इनका स्वभाव भी खास

पलामू,(झारखंड):यूं तो पलामू टाइगर रिजर्व ( पीटीआर) की पहचान बाघों के लिए है लेकिन यहां हाथी भी कम नहीं हैं। झारखंड में सबसे ज्यादा यहां हाथी पाए जाते हैं। साल 2017 की गणना के अनुसार राज्य में 679 हाथी थे। इनमें अकेले पीटीआर ( बेतला नेशनल पार्क) में 186 हाथी थे। यहां के हाथियों की खासियत यह है कि वह बहुत उग्र नहीं हैं। जन-जीवन पर हमला कम करते हैं और चारा-पानी की तलाश में बहुत दूर तक नहीं जाते। एक सीमा तक ही घूमते हैं।

बारेसाढ़ और गारू रेंज में हाथियों का जमावड़ा

बेतला नेशनल पार्क के बारेसाढ़ और गारू रेंज में हाथी बहुतायत की संख्या में पाए जाते हैं। ये हाथी बारिश शुरू होते ही बेतला और बरवाडीह की तरफ चले आते हैं। हाथियों की खासियत यह है कि जिधर से जाते हैं उधर से वापस नहीं होते। ये वृताकार चलते हैं। बेतला आने वालों को बाघ का दर्शन हो या न हो हाथी देखकर रोमांचित होते हैं।

हाथी दिवस मनाने का उद्देश्य

विश्व हाथी दिवस हर साल 12 अगस्त को मनाया जाता है। एलिफेंट रिइंट्रोडक्शन फाउंडेशन और फिल्म निर्माताओं पेट्रीसिया सिम्स और माइकल क्लार्क द्वारा साल 2011 में इस दिवस को मनाने का फैसला किया गया और पहली बार अंतरराष्ट्रीय हाथी दिवस 12 अगस्त 2012 को मनाया गया। दरअसल, एशियाई और अफ्रीकी हाथियों की दुर्दशा के बारे में जागरूकता फैलाने और उनकी तरफ ध्यान आकर्षित करने के उद्देश्य से इस दिवस को मनाने की शुरुआत की गई थी।

घट रही गजराज की संख्या

भारत में हाथी को राष्ट्रीय धरोहर के पशु का दर्जा हासिल है। हर पांच साल में हाथियों की गिनती की जाती है। पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय के मुताबिक, साल 2017 में देश में लगभग 23 राज्यों से लिए गए आंकड़ों के अनुसार लगभग 27,312 हाथी थे। इनमें झारखंड में 679 थे। साल 2012 में इनकी संख्या 29,576 के आसपास थी।

पहली बार बाघों के साथ गिनती

बाघ और हाथी की गिनती अलग-अलग होती रही है। पहली बार बाघ और हाथी की गिनती एक साथ हो रही है। गिनती भी अगल हटकर डीएनए आधारित हो रही है। विश्व बाघ दिवस पर 29 जुलाई को गणना रिपोर्ट जारी होनी थी। कई राज्यों की रिपोर्ट कंपाइल नहीं होने के कारण गणना रिपोर्ट जारी नहीं की जा सकी। उम्मीद की जा रही है कि आने वाले कुछ दिनों में रिपोर्ट जारी होगी। इसके बाद झारखंड और पीटीआर में हाथियों की संख्या की सही तस्वीर सामने आएगी।

बेतला में बड़ी संख्या में हाथी पाए जाते हैं। यहां बांस के जंगल हैं। इन्हीं जंगलों में रमे रहते हैं। ये 12 से 16 घंटा तक भोजन में अपना समय बिताते हैं। मानव जन-जीवन से यहां टकराव नहीं होने के कारण यहां के हाथी स्वभाव से उग्र नहीं हैं।

मुकेश कुमार, उप निदेशक, पीटीआर

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