
फसलों और अच्छी खेती के लिए बारिश का पूर्वानुमान लगाने के लिए 31 मार्च से शुरू होगा आदिवासी प्रकृति का त्योहार ‘सरहुल’ पूजा महोत्सव : सरना पुजारी जगलाल पाहन”
“सरहुल पूजा की तैयारी शुरू,सरना स्थल की साफ सफाई और सज्जा का काम प्रारम्भ “
“सरहुल की शोभा यात्रा मे लाखों की संख्या मे स्त्री- पुरुष और युवा शामिल होते है”
रांची,(झारखंड):सरना आदिवासी पुजारी जगलाल पाहन ने बताया कि तीन दिवसीय आदिवासी प्रकृति का त्योहार ‘सरहुल’ पूजा महोत्सव समारोह 31 मार्च से शुरू होगा।
पाहन ने बताया कि आदिवासी समुदाय के लोग व्रत रखेंगे और प्रकृति देवता की पूजा करेंगे।इस अवसर पर आदिवासी समुदाय नदी और तालाबों से केकड़ा और मछली पकड़ेंगे और प्रकृति देवता को अर्पित करेंगे।उन्होंने बताया कि सरहुल आदिवासी समुदाय की कला और संस्कृति को दर्शाता है।वे मुंडारी भाषा में बोंगा कहे जाने वाले पूर्व देवता (सूर्य देवता) की पूजा करते हैं।श्रींग बोंगा या धर्मेश का आह्वान मातृभूमि के लिए किया जाता है।सिनगी बोंगा का आह्वान सूर्य देवता के लिए किया जाता है।ईकर बोंगा का आह्वान दिव्य जल के लिए किया जाता है।
वीर बोंगा का आह्वान प्रकृति पेड़-पौधों के लिए किया जाता है।
“बुरु बोंगा पर्वतों और पठारों के लिए है।”
पाहन ने कहा कि आदिवासी अपने पूर्वजों को याद करते हैं और फसलों और अच्छी खेती के लिए बारिश की भविष्यवाणी करते हैं।संपूर्ण पृथ्वी की शांति, समृद्धि और कल्याण के लिए पर्यावरण और प्रकृति की प्रार्थना करते हैं।उन्होंने कहा कि जलवायु परिवर्तन और पर्यावरण क्षरण आदिवासी समुदाय के लिए एक चुनौती है।पहाड़ी क्षेत्रों में खनिजों का खनन, वनों की कटाई, जल संसाधन समाप्त होने वाले हैं।
आदिवासी प्राचीन काल से ही ‘साल’ वृक्ष की पूजा करते हैं और पर्यावरण और प्रकृति को संरक्षित करते हैं।
पर्यावरण की रक्षा करना हमारा कर्तव्य है।
सरहुल पूजा महोत्सव आदिवासी समुदाय की पारंपरिक रीति-रिवाज का प्रतिबिंब है।
इस अवसर पर आदिवासी युवा नए कैलेंडर वर्ष का स्वागत करते हैं।
पाहन ने कहा कि 1 अप्रैल को सरहुल पूजा महोत्सव जुलूस निकाला जाएगा।
2 अप्रैल को फूलखोसी और ग्राम भ्रमण यात्रा निकाली जाएगी।