नाथनगर अंचल में बाढ़ राहत में अनियमितता: जनप्रतिनिधियों ने NH-80 पर धरना प्रदर्शन की चेतावनी दी
शुभम कुमार/भागलपुर:वर्ष 2018 की भीषण बाढ़ से प्रभावितों परिवारों को राहत पहुँचाने में नाथनगर अंचल प्रशासन की लापरवाही एक बार फिर सामने आई है। जनप्रतिनिधियों का आरोप है कि बाढ़ से पीड़ित परिवारों का नाम एंट्री से जानबूझकर वंचित किया गया, जिससे हजारों परिवार सरकारी सहायता से वंचित रह गए। जनप्रतिनिधियों द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार, नाथनगर अंचल के एक पंचायत क्षेत्र को बाढ़ प्रभावित घोषित किया गया था, और अंचलाधिकारी के निर्देशानुसार मात्र तीन डाटा ऑपरेटरों से राहत फॉर्म की एंट्री कराई गई। इस प्रक्रिया में केवल 800-1000 फार्मों की एंट्री संभव हो सकी, जबकि अंचल कार्यालय में लगभग 10,000 फार्म जनता एवं जनप्रतिनिधियों द्वारा जमा किए गए थे। चौंकाने वाली बात यह है कि अंचल कार्यालय ने लगभग 90% फार्मों की एंट्री नहीं कराई और आरोप है कि शेष फार्मों को जानबूझकर नष्ट कर दिया गया। जनप्रतिनिधियों ने दावा किया है कि अंचलाधिकारी ने सैकड़ों फार्मों को “कूड़े में फेंकवा” दिया और जब उनसे आंकड़े देने की माँग की गई, तो सभी कर्मचारी एवं पदाधिकारी टाल-मटोल करने लगे। इस गंभीर लापरवाही से जनप्रतिनिधियों की साख पर भी प्रश्नचिह्न लग गया है, क्योंकि जनता अब उनसे जवाब माँग रही है। पीड़ित परिवार लगातार अपने जनप्रतिनिधियों से सहायता की गुहार लगा रहे हैं, जिससे प्रतिनिधियों को भारी दबाव का सामना करना पड़ रहा है। स्थिति से नाराज़ होकर, जनप्रतिनिधियों ने अब आवाज़ बुलंद करने का फैसला लिया है। उनका कहना है कि यदि प्रशासन ने जल्द इस विषय पर संज्ञान नहीं लिया और दोषियों पर कार्रवाई नहीं की, तो NH-80 पर धरना प्रदर्शन किया जाएगा। इसमें न केवल जनप्रतिनिधि, बल्कि सैकड़ों पीड़ित परिवार भी भाग लेंगे। धरना-प्रदर्शन की योजना को लेकर क्षेत्र में हलचल तेज हो गई है। अब देखना यह है कि प्रशासन इस गंभीर आरोप पर क्या कदम उठाता है और क्या पीड़ित परिवारों को उनका हक मिल पाएगा या नहीं।





