नवीन, गुड़िया व रिया लातेहार में परिवार पॉलिटिक्स के फैमिली पैकेज ने बढ़ाया चुनावी तापमान चुनाव में न सिर्फ विकास, जनसरोकार व स्थानीय मुद्दे चर्चा में हैं, बल्कि एक ही परिवार से तीन प्रत्याशियों की मौजूदगी ने दे दी है राजनीतिक विमर्श को नई दिशा

रूपेश कुमार, इंडिया प्राइम न्यूज लातेहार (झारखंड) : नगर पंचायत लातेहार का चुनाव इस बार सामान्य स्थानीय निकाय चुनाव से कहीं आगे निकल चुका है। इस चुनाव में न सिर्फ विकास, जनसरोकार और स्थानीय मुद्दे चर्चा में हैं, बल्कि एक ही परिवार से तीन प्रत्याशियों की मौजूदगी ने राजनीतिक विमर्श को नई दिशा दे दी है। निर्वतमान नगर पंचायत उपाध्यक्ष नवीन कुमार सिन्हा, उनकी पत्नी गुड़िया सिन्हा और बेटी रिया सिन्हा तीनों का एक साथ चुनावी मैदान में उतरना लातेहार की राजनीति में एक असामान्य लेकिन प्रभावशाली घटना के रूप में देखा जा रहा है।एक परिवार, तीन उम्मीदवारनवीन कुमार सिन्हा ने वार्ड नंबर चार से नामांकन दाखिल कर अपनी राजनीतिक पकड़ को एक बार फिर परखने का फैसला किया है। वहीं उनकी पत्नी गुड़िया सिन्हा, जो निवर्तमान वार्ड सदस्य रह चुकी हैं, वार्ड नंबर 15 से चुनाव लड़ रही हैं। इसी वार्ड से उनकी बेटी रिया सिन्हा का नामांकन राजनीतिक रूप से सबसे ज्यादा चर्चा में है, क्योंकि यह सीधा संकेत देता है कि परिवार अपनी राजनीतिक विरासत को अगली पीढ़ी तक विस्तार देना चाहता है।

वार्ड 15 बना सियासी केंद्रराजनीतिक दृष्टि से वार्ड नंबर 15 इस चुनाव का सबसे दिलचस्प केंद्र बन गया है। एक ही परिवार से दो उम्मीदवार होने के कारण यहां वोटों के बंटवारे और रणनीतिक समर्थन को लेकर कई तरह के अनुमान लगाए जा रहे हैं। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह स्थिति विरोधियों के लिए अवसर भी बन सकती है और परिवार के लिए जोखिम भी, यदि वोट बैंक में स्पष्ट विभाजन हुआ।वंशवाद बनाम जनाधार की बहसचुनावी बहस में “वंशवाद” शब्द भी तेजी से उभर रहा है। विपक्षी खेमे का आरोप है कि यह परिवार सत्ता और प्रभाव को घर तक सीमित रखने की कोशिश कर रहा है। वहीं समर्थकों का तर्क है कि यह वंशवाद नहीं, बल्कि वर्षों की जनसेवा और जनता के भरोसे का परिणाम है, जिसके चलते एक ही परिवार के कई सदस्य चुनाव लड़ने का साहस कर पा रहे हैं।घरेलू राजनीति से सार्वजनिक रणनीति तकस्थानीय लोगों में यह चर्चा आम है कि इस परिवार का घर अब पूरी तरह चुनावी रणनीति का केंद्र बन चुका होगा। सुबह की शुरुआत राजनीतिक फीडबैक से और रात का अंत वोट गणित पर चर्चा से होने की बातें कही जा रही हैं। यह स्थिति दर्शाती है कि राजनीति अब सिर्फ सार्वजनिक मंचों तक सीमित नहीं, बल्कि घरेलू निर्णयों का भी हिस्सा बन चुकी है।चुनाव परिणाम से आगे की कहानीकुल मिलाकर, लातेहार के वार्ड नंबर चार और पंद्रह में यह चुनाव केवल जीत-हार का सवाल नहीं है। यह स्थानीय राजनीति में परिवार आधारित नेतृत्व, मतदाता व्यवहार और भविष्य की राजनीतिक दिशा को समझने का एक अहम उदाहरण बन चुका है। नतीजे चाहे जो हों, लेकिन इतना तय है कि इस चुनाव ने लातेहार की सियासत को एक नया राजनीतिक केस-स्टडी दे दिया है, जिसकी चर्चा चुनाव बाद भी लंबे समय तक होती रहेगी।






