अस्पताल में सर्पदंश के मरीज का महिला तांत्रिक से झाड़-फूंक : सुपौल में डॉक्टर की चेतावनी को किया नजरअंदाज; अंधविश्वास में डटे रहे परिजन
कुणाल कुमार सुपौल:सुपौल जिले के ग्रामीण इलाकों में आज भी अंधविश्वास की गहरी जड़ें जमी हुई हैं। आधुनिक चिकित्सा व्यवस्था और वैज्ञानिक उपलब्धियों के बावजूद लोग झाड़-फूंक जैसे अवैज्ञानिक तरीकों पर भरोसा कर रहे हैं। ताजा मामला राघोपुर रेफरल अस्पताल का है, जहां सर्पदंश के एक गंभीर मरीज के इलाज के दौरान परिजनों ने अस्पताल परिसर में ही झाड़-फूंक करवाया।
मामला राघोपुर प्रखंड अंतर्गत हुलास वार्ड संख्या 9 का है। यहां 50 वर्षीय जगदीश सादा मंगलवार की शाम लगभग चार बजे खेत में कुदाल चला रहे थे, तभी एक जहरीले सांप ने उन्हें डंस लिया। परिजनों ने तुरंत उन्हें राघोपुर रेफरल अस्पताल पहुंचाया, जहां बुधवार की सुबह ड्यूटी पर मौजूद डॉ. विपिन तिवारी ने मरीज को इमरजेंसी वार्ड में भर्ती कर इलाज शुरू किया। मरीज की हालत गंभीर देखते हुए डॉक्टर ने लगातार 28 एंटीवेनम इंजेक्शन लगाए।डॉक्टरों की तत्परता और इलाज से मरीज की स्थिति स्थिर हो गई, लेकिन इसके बावजूद परिजन अंधविश्वास से बाहर नहीं निकल सके। डॉक्टर और सुरक्षा गार्ड द्वारा बार-बार मना करने के बावजूद परिजन एक महिला तांत्रिक को अस्पताल ले आए और इमरजेंसी वार्ड के भीतर ही झाड़-फूंक करवाने लगे। इस दौरान अस्पताल स्टाफ और डॉक्टर ने उन्हें रोका भी, लेकिन महिला तांत्रिक और परिजन नहीं माने।ड्यूटी पर तैनात डॉक्टर ने बताया कि मरीज जब अस्पताल आया था तब उसकी हालत बेहद नाजुक थी, लेकिन समय पर इलाज और एंटीवेनम देने से उसकी जान बचाई जा सकी। इसके बावजूद परिजन अस्पताल जैसे संवेदनशील स्थान पर अंधविश्वास का सहारा ले रहे हैं, जो कि न केवल गलत है, बल्कि दूसरे मरीजों की सुरक्षा के लिए भी खतरा पैदा करता है।