जर्जर स्कूल भवन में मौत के साए तले पढ़ाई, बच्चों में डर का माहौल
कुणाल कुमार/सुपौल:बिहार में शिक्षा विभाग भले ही रोज सुधार और नई घोषणाओं के दावे कर रहा हो, लेकिन हकीकत ज़मीनी स्तर पर कुछ और ही कहानी बयां करती है। जिला मुख्यालय से महज 5 किलोमीटर दूर स्थित प्राथमिक विद्यालय मालिकाना हिंदी के मासूम बच्चे अपनी जान जोखिम में डालकर पढ़ाई करने को मजबूर हैं।विद्यालय भवन की हालत इतनी खस्ताहाल है कि इसे मौत का कुआं कहना गलत नहीं होगा। क्लासरूम की छत पूरी तरह जर्जर हैं, प्लास्टर जगह-जगह से उखड़ चुका है, और कभी भी कोई बड़ा हादसा हो सकता है। कुछ कक्षाओं में पढ़ाई बरामदे में चलती है, जबकि बाकी बच्चे डरते-सहमे टूटती छत के नीचे बैठकर पढ़ने को विवश हैं।एक छात्र ने बताया, क्लासरूम में डर लगता है, छत का टुकड़ा कभी भी गिर जाता है।वहीं, विद्यालय की प्रधान कुमारी शिखा ने बताया कि वह महज 10 दिन पहले यहां पदस्थापित हुई हैं। उन्होंने कहा, विद्यालय की स्थिति देख विभाग को तुरंत सूचित किया है। आज ही मेरे टेबल पर छत का टुकड़ा गिरा, यह बेहद खतरनाक है।