इलाज की उड़ान बनी अंतिम सफर: चतरा के जंगलों में एयर एंबुलेंस क्रैश, उम्मीदें राख में तब्दील
लातेहार/चतरा (झारखंड):झारखंड के आसमान में सोमवार की शाम उड़ान भरती एक उम्मीद अचानक राख बनकर जंगलों में बिखर गई। चतरा जिले के सिमरिया थाना क्षेत्र अंतर्गत कसारी-करमाटांड़ गांव के पास घने जंगलों में एयर एंबुलेंस के गिरने की खबर जैसे ही फैली, पूरे इलाके में सन्नाटा पसर गया। जंगल की खामोशी को चीरती हुई एक जोरदार आवाज आई और फिर धुएं का गुबार… मानो किसी की आखिरी सांस आसमान में ही थम गई हो। शाम 7:11 बजे एयर एंबुलेंस ने बिरसा मुंडा एयरपोर्ट से दिल्ली के लिए उड़ान भरी थी। भीतर जिंदगी बचाने की जद्दोजहद थी, बाहर परिजनों की प्रार्थनाएं।लेकिन टेकऑफ के महज 23 मिनट बाद, करीब 7:34 बजे विमान का रडार से संपर्क टूट गया। कुछ ही देर में खबर आई—विमान चतरा के जंगलों में दुर्घटनाग्रस्त हो चुका है। इस एयर एंबुलेंस में सात लोग सवार थे दो पायलट, एक डॉक्टर, एक पैरामेडिक, दो परिचारक और वह मरीज, जिसकी सांसों को बचाने के लिए यह पूरी उड़ान भरी गई थी। प्रारंभिक सूचना के अनुसार 41 वर्षीय संजय कुमार की मौत हो गई है। अन्य लोगों की स्थिति को लेकर आधिकारिक पुष्टि का इंतजार है, लेकिन आशंकाएं गहरी हैं। संजय कुमार लातेहार जिले के चंदवा थाना क्षेत्र के सरोजनगर निवासी थे।

जलने की गंभीर पीड़ा से जूझ रहे संजय को बेहतर इलाज के लिए दिल्ली ले जाया जा रहा था। परिवार की आंखों में उम्मीद थी कि राजधानी के अस्पताल में पहुंचते ही शायद जिंदगी फिर मुस्कुरा उठेगी। घर में दुआएं हो रही थीं, रिश्तेदार दिल थामे बैठे थे। लेकिन किसे पता था कि यह उड़ान इलाज नहीं, एक अनहोनी की ओर जा रही है। घटना की सूचना मिलते ही स्थानीय पुलिस, प्रशासन और राहत दल घने जंगलों की ओर दौड़े। ऊबड़-खाबड़ रास्ते, अंधेरा और जंगल की भयावह खामोशी इन सबके बीच बचावकर्मी जीवन की तलाश में जुटे रहे। हर कदम पर एक ही उम्मीद थी शायद कोई सांस अभी बाकी हो।
नागर विमानन महानिदेशालय (DGCA) और संबंधित एजेंसियां जांच में लग गई हैं। हादसे के कारणों पर अभी रहस्य का पर्दा है। रडार से संपर्क टूटने के बाद विमान का कोई संकेत नहीं मिला, और फिर जो मिला, वह दिल दहला देने वाला था। चतरा के जंगलों में बिखरे इस मलबे ने सिर्फ एक विमान को नहीं, कई सपनों को तोड़ दिया। यह हादसा याद दिलाता है कि जिंदगी कितनी नाजुक है एक पल में उम्मीदों की उड़ान, अगले ही पल खामोशी में तब्दील। पूरे इलाके में मातम है, और हर आंख नम।







