रेसिंग कार जैसी आवाज से हड़कंप जंगल में दौड़े 300 ग्रामीण, विमान के मलबे तक पहुंची मानवता की रोशनी
सत्येंद्र प्रसाद,बारियातू (लातेहार):चतरा जिले के कसारी-करमाटांड़ गांव के घने जंगलों में सोमवार की शाम अचानक हड़कंप मच गया। आसपास के गांवों में लोग अपने घरों की खिड़कियों और दरवाजों से बाहर झांकने लगे। स्थानीय युवकों ने बताया कि एयर एंबुलेंस गिरते समय रेसिंग कार जैसी तेज आवाज लगभग 15 किलोमीटर दूर तक सुनाई दी। आवाज इतनी जोरदार थी कि जंगल की खामोशी को चीरते हुए कई गांवों में हर किसी का ध्यान वहां खिंच गया।

ग्रामीणों का पलभर में जुटना :जैसे ही यह आवाज सुनाई दी, लगभग 300 ग्रामीण तुरंत जंगल की ओर दौड़ पड़े। घना अंधेरा, दुर्गम रास्ते और वन क्षेत्र की घनी चुप्पी इन सबके बावजूद ग्रामीणों ने हिम्मत नहीं हारी। हर किसी के मन में यही सवाल था कि आवाज की गूंज के पीछे क्या हुआ। उन्होंने एक-दूसरे को उत्साहित किया और जंगल की ओर कदम बढ़ाए। कई लोगों ने कहा कि डर का कोई मतलब नहीं था, इंसानियत और जरूरत ने उन्हें आगे बढ़ाया।

मनोज यादव का पहला दृश्य :स्थानीय निवासी मनोज यादव ने बताया कि वह सबसे पहले विमान का इंजन देखकर स्तब्ध रह गया। इंजन देखकर ही सभी को समझ में आया कि विमान गंभीर रूप से दुर्घटनाग्रस्त हो गया है। मैंने इंजन देखा और मन ही मन सोचा, यह बड़ा हादसा है, हमें सबको सुरक्षित बाहर निकालना होगा। उसके बाद ग्रामीणों ने मिलकर आसपास की खोज शुरू की।जंगल में हर कदम पर सावधानी : जंगल में प्रवेश करते ही हर कदम पर सतर्कता बरतनी पड़ी। घने पेड़ों, घास और झाड़ियों के बीच आगे बढ़ना चुनौतीपूर्ण था। कुछ जगहों पर जमीन इतनी अस्थिर थी कि पैर फिसलने का डर था, फिर भी ग्रामीणों ने हिम्मत नहीं हारी। उन्होंने मोबाइल फोन की टॉर्च की रोशनी में रास्ता बनाया और मलबे की ओर बढ़ते गए।

एक किलोमीटर में बिखरे विमान के पार्ट्स :ग्रामीणों ने बताया कि विमान का मलबा लगभग 1 किलोमीटर तक फैला हुआ था। विमान के कई पार्ट्स जंगल में बिखरे थे इंजन, पंखा, सीटें और उपकरण। हर जगह टूटा हुआ मलबा, खंडित धातु और उड़ते हुए पेड़ों की शाखाओं ने यह बताने की कोशिश की कि विमान कितनी भीषण टक्कर के बाद गिरा।जंगल की घनी हरियाली और अंधेरा राहत कार्य के लिए चुनौती बने, लेकिन ग्रामीणों की हिम्मत और एकजुटता ने मलबे तक पहुंचना संभव बनाया। जंगल में हर तरफ पेड़-पौधे और घास के बीच मलबे के टुकड़े बिखरे थे। यह दृश्य देखकर रोंगटे खड़े हो गए।

मोबाइल टॉर्च की रोशनी में उम्मीद :घना अंधेरा और कठिन रास्ते राहत कार्य में सबसे बड़ी बाधा थे। बड़े फ्लड लाइट और अन्य साधनों की अनुपस्थिति में ग्रामीणों ने अपने मोबाइल टॉर्च की रोशनी से जंगल में राह बनाई। यह झिलमिलाती रोशनी न केवल रास्ता दिखाने का काम कर रही थी बल्कि मनोबल बढ़ाने और सुरक्षा सुनिश्चित करने का भी कार्य कर रही थी। सैकड़ों मोबाइल टॉर्च की रोशनी ने जंगल के अंधेरे में एक जीवंत नज़र पैदा की। राहत दल और ग्रामीण उसी रोशनी में आगे बढ़ते हुए मलबे तक पहुंचे। ग्रामीणों ने बताया कि यह दृश्य किसी फिल्म की तरह था अंधेरे में टिमटिमाती रोशनी, बीच-बीच में टूटे विमान के पार्ट्स, और लोग अपनी हिम्मत और जज़्बे के साथ आगे बढ़ रहे थे।
वन क्षेत्र की घोर चुनौती :जहां विमान गिरा, वह पूरी तरह वन क्षेत्र से घिरा हुआ है। घना जंगल, ऊबड़-खाबड़ रास्ते और अचानक उग आए पेड़ और झाड़ियाँ बचाव कार्य के लिए चुनौती बने। कई जगह पैदल चलना मुश्किल था। कुछ हिस्सों में जमीन खिसकने का खतरा था। इसके बावजूद ग्रामीणों ने मिलकर खोज जारी रखी।ग्रामीणों की एकजुटता और इंसानियत :स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि हर किसी की कोशिश ने यह साबित कर दिया कि संकट में इंसानियत और एकजुटता सबसे बड़ी ताकत होती है। आवाज सुनकर दौड़े लोग, मनोज यादव की पहचान और मोबाइल टॉर्च की रोशनी इन तीन चीज़ों ने मिलकर मौके पर राहत अभियान को जीवन दिया। ग्रामीणों ने बताया कि उन्होंने पहले विमान के प्रमुख हिस्सों को ढूंढ़ा, फिर छोटे-मोटे टुकड़ों और मलबे की तरफ बढ़ते गए। हर किसी ने अपनी भूमिका निभाई। कुछ लोग टॉर्च पकड़कर रोशनी बनाए रखे, कुछ लोग मलबा हटाने में मदद कर रहे थे। छोटे बच्चों और बुजुर्गों ने भी हौसला बढ़ाने का काम किया।
एक जीवंत और भावनात्मक दृश्य :घने जंगल और अंधेरे के बीच यह दृश्य बेहद मार्मिक और रोमांचक था। मोबाइल टॉर्च की झिलमिलाती रोशनी में धातु के बिखरे टुकड़े चमक रहे थे। टूटे विमान के हिस्से जैसे जंगल में पड़े हुए किसी युद्ध के अवशेष लग रहे थे। ग्रामीणों ने बताया कि हर कदम पर उनका दिल धड़क रहा था, लेकिन डर के बावजूद उन्होंने हिम्मत नहीं हारी। ग्रामीणों के लिए यह सिर्फ एक दुर्घटना नहीं थी। वे मानवीय भावना से जुड़कर मदद करना चाहते थे। उन्होंने कहा कि “अगर हम नहीं पहुंचते, तो कई जिंदगी बचाई नहीं जा सकती थी। यह आवाज ने हमें चेताया और हमारी जिम्मेदारी समझाई।

इंसानियत की दिखाई दी सबसे बड़ी मिसाल :घटना ने यह दिखा दिया कि संकट के समय इंसानियत, हिम्मत और सहयोग सबसे बड़ी ताकत बन जाती है। ग्रामीणों का जुटना, मनोज यादव का नेतृत्व और मोबाइल टॉर्च की रोशनी यह सब मिलकर जंगल में मानवता की चमक बन गई।




