नई दिल्ली:जम्मू-कश्मीर और हिमाचल प्रदेश में एक बार फिर बादल फटने से तबाही मची है। रविवार सुबह जम्मू-कश्मीर के कठुआ जिले में बॉर्डर से सटे तीन जगहों पर बादल फटा। इनमें जोद घाटी इलाके की स्थिति सबसे गंभीर रही, जहां चार लोगों की मौत हो गई और छह लोग घायल हुए हैं। मथरे चक, बगार्ड-चंगड़ा और दिलवान-हुटली में भी भारी भूस्खलन हुआ, जिससे कई घर और सड़कें मलबे में दब गईं।14 अगस्त को भी किश्तवाड़ के चसोटी इलाके में बादल फटने की घटना हुई थी और अब तीन दिन के भीतर यह दूसरी बड़ी घटना है। जोद गांव का शहर से संपर्क टूट गया था, हालांकि रेस्क्यू टीम ने कठिनाई के बाद वहां पहुंचकर फंसे लोगों को बाहर निकाला। कई घरों में पानी और मलबा कई फीट तक भर गया है। घायलों को नजदीकी अस्पताल में भर्ती कराया गया है।कठुआ डिप्टी एसपी राजेश शर्मा ने बताया कि भूस्खलन में दो से तीन मकान पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गए हैं और करीब छह लोगों के दबे होने की आशंका है। जांगलोट समेत नेशनल हाईवे पर कई जगह सड़क टूट गई है और रेलवे ट्रैक पर भी यातायात प्रभावित हुआ है।इधर, हिमाचल प्रदेश में भी मानसून कहर बरपा रहा है। सुबह करीब चार बजे कुल्लू जिले के टकोली में बादल फटने से भारी तबाही हुई। पनारसा और नगवाई में फ्लैश फ्लड से चारों तरफ मलबा फैल गया, जिससे गांवों और सड़कों की हालत बिगड़ गई है।इस बीच मौसम विभाग ने चेतावनी दी है कि जम्मू-कश्मीर में 17 से 19 अगस्त तक भारी बारिश हो सकती है। जम्मू, रियासी, उधमपुर, राजौरी, पुंछ, सांबा, कठुआ, डोडा, किश्तवाड़, रामबन और कश्मीर के कुछ हिस्सों में बादल फटने और लैंडस्लाइड की संभावना जताई गई है।लगातार हो रही बारिश और बादल फटने की घटनाओं से पहाड़ी राज्यों में जनजीवन अस्त-व्यस्त हो गया है और लोग दहशत में हैं।