अस्पताल में मिले झारखंड के दो चेहरे, आंखों की जांच से शुरू हुई बात पहुंची गांव-जंगल और भविष्य तक मीनाक्षी नेत्रालय में स्वास्थ्य सचिव अजय कुमार सिंह से डॉ. अभिषेक की लंबी बातचीत, स्वास्थ्य से लेकर झारखंड के विकास तक छिड़ी सार्थक चर्चा डॉ. अभिषेक बोले मुख्यमंत्री, आईएएस, आईपीएस, जनप्रतिनिधि और न्यायाधीश यहां आते हैं, मगर मेरी नजर चतरा के गांव-जंगल में बसने वाले झारखंड के भविष्य पर है
इंडिया प्राइम न्यूज रांची(झारखंड):झारखंड सरकार के स्वास्थ्य सचिव अजय कुमार सिंह गुरुवार को मीनाक्षी नेत्रालय पहुंचे। उन्होंने यहां अपना नेत्र परीक्षण कराया। इसी दौरान नेत्रालय के चिकित्सक डॉ. अभिषेक से उनकी लंबी और आत्मीय बातचीत हुई। चर्चा स्वास्थ्य से शुरू हुई और धीरे-धीरे झारखंड की स्वास्थ्य व्यवस्था, गांवों की स्थिति, प्रशासन और राज्य के भविष्य तक पहुंच गई। सहज व्यवहार और कार्यकुशलता के लिए पहचाने जाने वाले अजय कुमार सिंह के साथ हुई यह मुलाकात सामान्य स्वास्थ्य जांच से कहीं आगे निकल गई।
अस्पताल की चौखट पर मिट जाता है पद का फर्क :डॉ. अभिषेक ने कहा कि मीनाक्षी नेत्रालय में झारखंड के मुख्यमंत्री से लेकर आईएएस, आईपीएस अधिकारी, जनप्रतिनिधि और न्यायपालिका से जुड़े लोग तक मरीज बनकर आते हैं। अस्पताल की चौखट पर पद और प्रतिष्ठा का अंतर खत्म हो जाता है। यहां हर व्यक्ति सबसे पहले मरीज होता है और उसकी आंखों में स्वस्थ जीवन की वही उम्मीद होती है, जो किसी दूर-दराज गांव से आने वाले सामान्य व्यक्ति की आंखों में दिखाई देती है।
चतरा के गांव-जंगल में तलाश रहे झारखंड का भविष्य:डॉ. अभिषेक ने कहा कि वह चतरा लोकसभा क्षेत्र के गांव-गांव और जंगल-जंगल घूम रहे हैं। यह यात्रा केवल रास्तों को नापने की यात्रा नहीं है। यह लोगों को करीब से समझने, उनकी पीड़ा महसूस करने और उनके सपनों को जानने की कोशिश है। उन्होंने कहा कि चतरा की पगडंडियों पर चलते हुए झारखंड की असली तस्वीर दिखाई देती है।कहीं स्वास्थ्य की आस, कहीं रोजगार का इंतजार :उन्होंने कहा कि दूर-दराज के गांवों में आज भी बेहतर स्वास्थ्य सुविधा, गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, रोजगार और मूलभूत सुविधाओं की उम्मीद लोगों की आंखों में दिखाई देती है। इन उम्मीदों को केवल राजधानी में बैठकर नहीं समझा जा सकता। इसके लिए गांव की पगडंडी पर चलना और जंगल के बीच रहने वाले लोगों की आवाज सुनना जरूरी है। यही यात्रा उन्हें चतरा के गांवों और जंगलों तक ले जा रही है।

मुलाकात छोटी, सवाल पूरे झारखंड का :स्वास्थ्य सचिव और डॉ. अभिषेक के बीच हुई बातचीत में चतरा और ग्रामीण क्षेत्रों से जुड़े विभिन्न विषयों पर भी गंभीर चर्चा हुई। एक ओर राज्य की स्वास्थ्य व्यवस्था की जिम्मेदारी संभालने वाला अधिकारी था, दूसरी ओर गांव-जंगल की धूल फांककर लोगों के भविष्य को समझने की कोशिश में जुटा चिकित्सक। मुलाकात भले ही मीनाक्षी नेत्रालय में हुई, मगर चर्चा का दायरा पूरे झारखंड तक पहुंच गया।आंखों की जांच हुई, नजर भविष्य पर रही :मीनाक्षी नेत्रालय की यह मुलाकात इसलिए खास रही कि यहां आंखों की जांच के साथ झारखंड को देखने के नजरिए पर भी चर्चा हुई। शहर से लेकर गांव और सत्ता के गलियारों से लेकर जंगल की पगडंडी तक, हर जगह बेहतर झारखंड की जरूरत महसूस होती है। शायद यही वजह रही कि नेत्रालय में हुई यह मुलाकात आंखों की जांच से आगे बढ़कर उस झारखंड को देखने की कोशिश बन गई, जिसका भविष्य गांवों की उम्मीदों से तय होना है।




